क्यों एक स्त्री को बनना पड़ा पूरे नगर की वेश्या, जानिए आम्रपाली की कहानी

क्यों एक स्त्री को बनना पड़ा पूरे नगर की वेश्या, जानिए आम्रपाली की कहानी

अनुपम चंद्र/एलायंस टुडे डेस्क

प में से बहुत लोगों ने अब तक नगरवधू आम्रपाली की कहानी नहीं सुनी होगी, लेकिन आज हम आपको एक ऐसे ही दुख भरी या फिर कह सकते हैं की बहुत खतरनाक स्टोरी बताने जा रहे हैं जिसे सुनकर आप दंग रह जाएंगे। आपको बता दें कि आम्रपाली इतिहास की सबसे खूबसूरत स्त्रियों में से एक थी लेकिन इसी खूबसूरती ने उसे पूरे नगर की वेश्या बना दिया जिसे नगरवधू के नाम से जाना जाने लगा. आम्रपाली बहुत कम उम्र से ही नगर की वेश्या ठहरा दी गई थी लेकिन उसके साथ ऐसा क्यों हुआ यह जानने के लिए हमारे साथ चलिए आगे की स्टोरी में.

प्राचीन भारत में 500 ईसा पूर्व लिच्छवी गणराज्य की राजधानी वैशाली में एक गरीब दंपती को एक आम के पेड़ के नीचे एक लड़की पड़ी मिली थी. उसका नाम आम्रपाली रख दिया गया.

आम्रपाली अपने समय की सबसे खूबसूरत महिला थी. पाली ग्रन्थों में उसके सौंदर्य का विवरण मिलता है. आम्रपाली इतनी खूबसूरत थी कि नगर का हर पुरुष उससे विवाह करने के लिए लालायित था. पाली ग्रन्थों के मुताबिक, राजा से लेकर व्यापारी हर कोई आम्रपाली को पाना चाहता था. आम्रपाली के लिए शादी के प्रस्तावों के ढेर लग गए. इतने सारे विवाह प्रस्तावों की वजह से आम्रपाली के माता-पिता बड़ी दुविधा में फंस गए थे.
अगर आम्रपाली के लिए किसी एक को उसके माता-पिता चुनते तो नगर के बाकी पुरुष खफा हो जाते. नगर में अशांति तक फैल सकती थी.पाली ग्रन्थों के मुताबिक, वैशाली एक लोकतांत्रिक राज्य था जिसकी अपनी एक संसद भी थी. जब आम्रपाली की खबर वैशाली संसद के सदस्यों तक पहुंची तो उन्होंने इस मुद्दे पर चर्चा करने का फैसला किया. उन्होंने तय किया कि वैशाली राज्य की एकता और शांति के लिए सभी की खुशी को जरूरी है इसलिए आम्रपाली को नगरवधू बना दिया गया. आम्रपाली पूरे नगर की दुल्हन बन गई जिसे अब हर किसी से प्यार करना था.

आम्रपाली को नगरवधु बनाने से वैशाली के लोग तो खुश हो गए लेकिन इस तरह से आम्रपाली अपनी ही खूबसूरती का शिकार बन गई. आम्रपाली को जनपथ कल्याणी की उपाधि दी गई. यह खिताब 7 साल के लिए दिया जाता था और इसे साम्राज्य की सबसे खूबसूरत और प्रतिभाशाली महिला को दिया जाता था.आम्रपाली को अपना महल मिला. उसे शारीरिक संबंध बनाने के लिए अपना पार्टनर चुनने का अधिकार भी मिला. इसके साथ ही वह दरबार की नर्तकी भी बन गई. मगध के राजा बिम्बिसार के वैशाली के साथ हमेशा ही शत्रुतापूर्ण रिश्ते रहे थे. ऐसे में आम्रपाली से मिलने जाने के लिए उन्हें दूसरा भेष धारण करना पड़ा ताकि कोई उन्हें पहचान नहीं सके. बिंबिसार खुद एक संगीतकार था. जब वह आम्रपाली से मिले तो दोनों एक-दूसरे के साथ प्यार में पड़ गए. आम्रपाली बिंबिसार के बच्चे की मां भी बनीं. उसका बेटा आगे चलकर एक बौद्ध भिक्षु बन गया. एक बार जब बिंबिसार ने वैशाली पर आक्रमण किया तो उसने आम्रपाली के महल में शरण ली. उसी दौरान आम्रपाली को बिंबिसार की असली पहचान पता चल गई. आम्रपाली ने बिंबिसार से युद्ध रोकने के लिए कहा और बिंबिसार ने आम्रपाली की बात मान ली. बिंबिसार ने आम्रपाली को मगध की महारानी बनने का प्रस्ताव भी दिया लेकिन आम्रपाली ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया क्योंकि वैशाली और मगध शत्रु थे. अगर आम्रपाली ने बिंबिसार के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया होता तो शायद भयंकर युद्ध छिड़ जाता और हजारों लोग मारे जाते.

क्यों एक स्त्री को बनना पड़ा पूरे नगर की वेश्या, जानिए आम्रपाली की कहानी

एक बार की बात है जहां बड़े-बड़े व्यापारी, राजकुमार आम्रपाली पर मोहित हो गए थे वहीं आम्रपाली एक बौद्ध भिक्षु पर मोहित हो गईं. आम्रपाली ने बौद्ध भिक्षु को ना केवल खाने पर आमंत्रित किया बल्कि 4 महीने के प्रवास के लिए भी अनुरोध किया. बौद्ध भिक्षु ने उत्तर दिया कि वह अपने गुरू बुद्ध की आज्ञा के बाद ही ऐसा कर सकते हैं.बुद्ध ने सबको हैरानी में डालते हुए बौद्ध भिक्षु को इसकी अनुमति दे दी. 4 महीने बाद आम्रपाली बौद्ध भिक्षु के साथ आई और बुद्ध के चरणों में गिर गई. आम्रपाली ने कहा, मैं आपके बौद्ध भिक्षु को मोहित नहीं कर पाई लेकिन उनकी आध्यात्मिकता ने मुझे उन्हीं की राह पर चलने को विवश कर दिया है, ऐसा कहकर वह भिक्षुणी बन गई और भगवान गौतम बुद्ध के बताए हुए रास्ते पर चलने लगी.

(आचार्य चतुरसेन शास्त्री के उपन्यास वैशाली की नगरवधु और बुद्धचरित, जातक कथाओं पर आधारित)

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