काकोरी क्रान्ति की 95वीं वर्ष गाँठ पर संगोष्ठी कर शहीदों को अर्पित किए गये श्रद्धा सुमन

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एलायंस टुडे ब्यूरो

लखनऊ। काकोरी क्रांति की 50 वीं वर्षगांठ पर भारतीय नागरिक परिषद की ओर से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए संगोष्ठी आयोजित कर काकोरी क्रान्ति के अमर शहीदों को श्रद्धा सुमन अर्पित किए गए।

संगोष्ठी की अध्यक्षता परिषद के अध्यक्ष चंद्र प्रकाश अग्निहोत्री ने की। कार्यक्रम में कवि और लेखक उदय भान पांडे ने काकोरी कांड पर कविता के द्वारा कार्यक्रम को शुरू किया। भारतीय नागरिक परिषद कि मंत्री निशा सिंह ने क्रांतिकारियों को समर्पित गीत गाया तो वही तृप्ति भदोरिया ने बुंदेलखंड के गीत के माध्यम से क्रांतिकारियों को श्रद्धा सुमन अर्पित किए।

संगोष्ठी के मुख्य वक्ता ऑल इंडिया पावर इंजीनियर फेडरेशन के चेयरमैन शैलेंद्र दुबे ने काकोरी क्रांति का विस्तृत विवरण देते हुए क्रांतिकारियों की अमर कथा सुनाई। परिषद की महामंत्री रीना त्रिपाठी ने संगोष्ठी का संचालन किया।

मुख्य वक्ता शैलेंद्र दुबे ने कहा कि काकोरी क्रान्ति ने ब्रिटिश हुकूमत को बुरी तरह हिला कर रख दिया था क्योंकि सरकारी खजाना लूटकर क्रांतिकारियों ने ब्रिटिश तख्त को सीधी चुनौती दी थी।काकोरी में किसी अंग्रेज को नही मारा गया किन्तु ब्रिटश तख्त इतनी दहशत में आ गया था कि उन्होंने चार क्रांतिकारियों को फाँसी दी।

उन्होंने कहा कि शहीदों की जीवनी को प्रस्तुत करने का भारतीय नागरिक परिषद का उद्देश्य यही है कि जिन लोगों के दिमाग में यह ठूँस दिया गया है कि एक गुट विशेष ने भारत को स्वतंत्रता दिलाई है उन्हें सिक्के के दूसरे पहलू से भी अवगत कराया जाए जो कहीं अधिक उज्जवल है।

आज लोग राजनीति और राजनीतिक दल का नाम सुनते ही मुंह बिचकाने लगते हैं लेकिन एक समय ऐसा भी था जब क्रांतिकारियों के लिए देश सेवा एक साधना थी उन्हें इसका न कोई पुरस्कार मिला, न ही उनके नाम पर कोई नगर बनाया गया, न भवन बनाए गए, न सड़के बनाई गई फिर भी वे थे और रहेंगे और इतिहास में अमर रहेंगे। हमारे मन की पृष्ठभूमि में रहते हुए यह अमर शहीद सदैव हमें आलोक प्रदान करते रहेंगे।

उन्होंने कहा की नई पीढ़ी की देश, धर्म, इतिहास और परंपरा के विषय में अज्ञानता तथा भौतिकता के प्रति अत्यधिक झुकाव को देखते हुए अब यह और अधिक जरूरी हो गया है कि उन्हें भारत की स्वतंत्रता के लिए अपने जीवन का बलिदान करने वाले महान क्रांतिकारी का परिचय दिया जाए।

शैलेंद्र दुबे ने काकोरी क्रांति का विशेषतया ट्रेन डकैती का सजीव विवरण प्रस्तुत करते हुए विशेष रुप से क्रांति के महानायक पंडित राम प्रसाद बिस्मिल ,अशफाक उल्ला खान, ठाकुर रोशन सिंह और राजेंद्र लाहिड़ी के विषय में कई रोमांचकारी संस्मरण सुनाए। उल्लेखनीय है कि काकोरी क्रांति में इन चार क्रांतिकारियों को फांसी दी गई थी। उन्होंने कहा इन क्रांतिकारियों के बलिदान के फलस्वरूप ही आज हम स्वतंत्र भारत में रह रहे है ।आज काकोरी क्रांति के 95 वर्ष पूरे हो गए। जिस उद्देश्य से इन क्रांतिकारियों ने ब्रिटिश हुकूमत को चुनौती दी थी और स्वतंत्र भारत के जो सपने देखे थे उस दिशा में यदि हम इमानदारी से कुछ भी कर सकें तो आज इन अमर शहीदों को यही सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

संगोष्ठी को आईआईटी खड़कपुर के पूर्व डायरेक्टर शिशिर कुमार दुबे, पावर कारपोरेशन के पूर्व प्रबंध निदेशक एसके वर्मा, पावर कारपोरेशन के जनरल सेक्रेटरी प्रभात सिंह, लखनऊ के प्रख्यात आयुर्वेदाचार्य डॉ अजय दत्त शर्मा, महाराष्ट्र से अनुराग नायक, सूर्यकांत पवार ,गाजियाबाद से अभियंता दिनेश अग्रवाल, प्रख्यात समाजसेवी नीना शर्मा, त्रिभुवन शर्मा, राकेश पाण्डेय ,धनंजय द्विवेदी ने संबोधित किया।

कार्यक्रम में निशा सिंह, उषा त्रिपाठी, निष्ठा मिश्रा, कालिंदी रघुवंशी, महोबा से सविता सिंह, प्रेमा जोशी, चित्र त्रिपाठी, अमिता सचान, के रूप में महिला प्रतिनिधियों ने काकोरी क्रांतिकारी को नमन कियात। वही इसी के साथ राम कुमार पांडे, आलोक पांडे, आशुतोष पांडे, दीपक मिश्रा, हरेंद्र नाथ पांडे, नारायण सास्वत, शिव प्रकाश दीक्षित, विजय कुमार सिंह, विपिन मिश्रा, राम व्यास, राजेश्वर द्विवेदी, आलोक पांडे, श्रीकांत उपाध्याय, पुष्पेंद्र मिश्रा, राम मनोहर अवस्थी, कनिष्क राय, शरद मिश्रा ,एस गौतम ,आरपी त्रिपाठी, सुरेश कुमार, राम नरेश उपाध्याय सहित क्रांतिकारियों में आस्था रखने वाले तथा देश को नमन करने की भावना से विद जन उपस्थित हुए।

भारतीय नागरिक परिषद के अध्यक्ष चन्द्र प्रकाश अग्निहोत्री व महामंत्री रीना त्रिपाठी ने कहा किसी भी देश की स्वतंत्रता से संबंधित वास्तविक घटनाक्रम और तथ्य जितनी शीघ्रता से प्रकाश में लाया जाए उसका उतना ही अधिक सकारात्मक लाभ देश की जनता को सही मार्ग खोजने में मिलता है,पर दुर्भाग्य है कि स्वतंत्रता के 73 वर्ष व्यतीत हो जाने के बावजूद भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का सही विवरण अभी तक देशवासियों के सामने नहीं आ सका है।

भारतीय नागरिक परिषद ने इसी कार्य को करने का बीड़ा उठाया है और इस प्रकार के कार्यक्रम भारतीय नागरिक परिषद विगत 10 वर्ष से कर रहा है। वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए संपन्न हुई संगोष्ठी में अनेक विद्वान, बुद्धिजीवी, कर्मचारी, अधिकारी, अधिवक्ता, शिक्षक और आमजन बड़ी संख्या में सम्मिलित हुए।

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