Motivational Story: पढ़िये शुभम गुप्ता की सक्सेस स्टोरी

शुभम गुप्ता

एलायंस टुडे डेस्क

नई दिल्ली। सभी के जीवन में ऐसा समय आता है जब चीजें आपके विरोध में हो रही होती हैं। कहानी है वर्ष 2018 की आईएएस परीक्षा में 6वां रैंक हासिल करने वाले शुभम गुप्ता की जिन्होंने सफलता व संघर्ष की कहानी के साथ-साथ अपनी तैयारी की रणनीति साझा भी की।

शुभम गुप्ता ने आईएएस परीक्षा में चैथी बार प्रयास किया और ऑल इंडिया रैंक सूची में छठां स्थान हासिल किया। तीन बार प्रयास करने के बाद भी अपने लक्ष्य को प्राप्त नहीं करने पर शुभम ने हार नहीं मानी, और आखिरकार चैथे प्रयास में उन्होंने अपना लक्ष्य हासिल कर ही लिया।

बता दें कि शुभम ने वर्ष 2015 में अपना पहला प्रयास किया, लेकिन वे प्रारंभिक परीक्षा में उत्तीर्ण नहीं हो पाए। फिर वर्ष 2016 में उन्होंने अपना दूसरा प्रयास किया और सभी चरणों – प्रीलिम्स, मेन्स और इंटरव्यू को क्लीयर करके 366वीं रैंक हासिल की। जिससे उनका इंडियन ऑडिट एंड अकाउंट सर्विस में चयन हुआ।

शुभम में वर्ष 2017 में फिर से प्रयास किया, लेकिन इस बार वो प्रीलिम्स परीक्षा को क्लियर नहीं कर पाए। यह उनका तीसरा प्रयास था। लेकिन शुभम गुप्ता ने अब भी हार नहीं मानी और वर्ष 2018 में उन्होंने चैथी बार प्रयास किया और आईएएस परीक्षा 2018 में 6ठी रैंक हासिल किया।

शुभम ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा जयपुर, राजस्थान से पूरी की। फिर आर्थिक तंगी के कारण उनका परिवार महाराष्ट्र के एक छोटे से गांव दहानु रोड में शिफ्ट हो गया। शुभम ने गुजरात के वापी के पास एक स्कूल में 8वीं से 12वीं तक की शिक्षा पूरी की। शुभम और उनका परिवार कुछ समय तक आर्थिक तंगी से संघर्ष करते रहे।

अपने परिवार की मदद करने के लिए शुभम वापी में अपने स्कूल पूरा करने के बाद दहानू रोड स्थित परिवार की दुकान पर हर दिन काम करते थे। लेकिन संघर्ष के दिनों में भी उन्होंने अपनी पढ़ाई से कभी समझौता नहीं किया।

इसलिए स्कूल और दुकान दोनों में अपने समय का उपयोग करने के लिए वे अपनी किताबें दुकान पर ले जाते थे। वे काम करते हुए भी पढ़ाई करते थे। इस तरह से शुभम ने अपने स्कूल की परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त किए।

शुभम बताते हैं कि परीक्षा की तैयारी करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अपने आप में विश्वास रखो। सफलता और असफलता दोनों ही जीवन का हिस्सा हैं और किसी को असफलता के समय निराशा महसूस नहीं करना चाहिए।

दूसरी सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अपनी तैयारी में अपना 100 फीसदी दें। ऐसे माहौल खोजने और तैयार करने की कोशिश करें जो आपकी सर्वोत्तम क्षमताओं को लाने में आपकी मदद करे।

ऐसे की प्रारंभिक परीक्षा की तैयारी

शुभम ने वर्ष 2015 में प्रारंभिक परीक्षा की तैयारी शुरू की और उन्होंने पहले अखबार पढ़ना शुरू किया। इसने उन्हें यह जानने में मदद मिली कि पर्यावरण, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मामलों या भारतीय अर्थव्यवस्था जैसे मामलों में आसपास क्या हो रहा है।

फिर उन्होंने विषय विशेष की तैयारी शुरू कर दी। एक विषय चुना और फिर उस विषय से संबंधित एनसीईआरटी पुस्तक को पढ़ा। उन्होंने पाठ्यक्रमों को विभाजित किया और एक-एक करके विषयों को पूरा किया। वहीं, अपनी ताकत और कमजोरी का आकलन करने के लिए मॉक टेस्ट का भी अभ्यास किया।

मुख्य परीक्षा के लिए ऐसे बनाई रणनीति

शुभम बताते हैं कि मुख्य परीक्षा के लिए आपको परीक्षा में खुद को अच्छी तरह से व्यक्त करने के लिए विषयों का गहन ज्ञान प्राप्त करना होगा। मैंने अपने प्रारंभिक परीक्षा की तैयारी की शुरुआत से ही अपने वैकल्पिक विषय के लिए नोट्स बनाना शुरू कर दिया था।

मैंने मुख्य रूप से उत्तर लेखन अभ्यास पर ध्यान केंद्रित किया। मैं जीएस 1, 2 3, 4 पेपर, वैकल्पिक 1 और 2 विषय पेपर और निबंध लेखन पेपर के कम से कम 2 मॉक टेस्ट देता था। आपका ध्यान पेपर को पूरा करने के लिए होना चाहिए, भले ही आप वर्णनात्मक पेपर में उत्तर नहीं जानते हों।

इंटरव्यू राउंड की महत्वपूर्ण बातें

शुभम के अनुसार इंटरव्यू राउंड की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अपने आत्मविश्वास और धैर्य के स्तर को बनाए रखें। इंटरव्यू से पहले अपने स्ट्रेस लेवल को मैनेज करने की कोशिश करें। शुभम बताते हैं कि मैं खुद को शांत और तनाव मुक्त बनाने के लिए चॉकलेट खाता था।

फिर जब आप इंटरव्यू बोर्ड रूम में प्रवेश करते हैं तो 2 मिनट की शुरुआत में खुद को शांत करने की कोशिश करें। यदि आप इंटरव्यूवर का अच्छी तरह से अभिवादन करने में सक्षम हैं और साक्षात्कार के पहले कुछ मिनटों में अच्छी तरह से अपनी सीट लेते हैं तो यह आपका आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद करेगा और आपको ज्ञान आधारित प्रश्नों के उत्तर देने में सहायता करेगा।

इंटरव्यू के दौरान, इंटरव्यूवर का ध्यान उन विषयों पर लाने का प्रयास करें जिनसे आप अवगत हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि आप इंटरव्यू का नेतृत्व कर सकते हैं। लेकिन, जब भी आपको इंटरव्यू का नेतृत्व करने का मौका मिले, तो इसे ले लें और इसका अधिकतम लाभ उठाएं।

शुभम बताते हैं कि मेरे रोल मॉडल मेरे पिता हैं, क्योंकि उन्होंने अपने जीवन में बहुत संघर्ष किया है। आर्थिक दिवालियापन से जूझते हुए भी वह हमारे जीवन में सुधार और संतुलन लाने में कामयाब रहे। उनका ‘नेवर से डाई स्पिरिट’ वास्तव में मुझे बहुत प्रेरित करता है।

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