17 गधे बुझा रहे दूरदराज इलाके में बसे आदिवासियों की प्‍यास

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एलायंस टुडे ब्यूरो

महाराष्‍ट्र । रंजन दासगुप्‍ता, नासिक महाराष्‍ट्र के कई इलाके भयानक सूखे के दौर से गुजर रहे हैं। नानदरबार जिले के दूरदराज की एक बस्‍ती तक पानी पहुंचाने का कोई तरीका नहीं सूझ रहा था। फिर प्रशासन ने अनोखी पहल के तहत 17 गधों की मदद से यहां पानी पहुंचाना शुरू कर दिया।

कोइलीदाबार नाम की यह बस्‍ती सतपुड़ा पहाड़ के घने जंगली इलाके में स्थित है। यहां तक कोई सड़क नहीं कोइलीदाबार नाम की यह बस्‍ती सतपुड़ा पहाड़ के घने जंगली इलाके में स्थित है। यहां तक कोई सड़क नहीं जाती इसलिए यहां टैंकर के जरिए पानी पहुंचाना नामुमकिन था। दूसरी ओर इस कस्‍बे में रह रहे 250 आदिवासियों की बिना पानी के हालत खराब हो रही थी। पानी के स्‍थानीय स्रोत सूखने के बाद गर्भवती महिलाओं तक को पीने का पानी लाने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ रही थी।

जिला अधिकारी बालाजी मंजुले ने हमारे सहयोगी टाइम्‍स ऑफ इंडिया को बताया कि इसके बाद गधों की मदद लेने का अनोखा विचार सामने आया। इस पर अमल किया गया और 19 मई से ये गधे ही 250 आदिवासियों की प्‍यास बुझा रहे हैं।

गधों के मालिकों को मिलेंगे 2 लाख रुपये 
इसके बाद प्रशासन ने आदिवासियों की इसी बस्‍ती में रहने वाले दो भाइयों के गधों का इस्‍तेमाल करने का इरादा किया। जिला प्रशासन के सूत्रों का कहना है, ‘ये दोनों भाई इन गधों पर अपना सामान लादते थे। लेकिन अब पानी लाने के लिए इन्‍हें हम स्‍थानीय ग्राम पंचायत के फंड से करीब 2 लाख रुपये देंगे।’

इस तरह अब ये 17 गधे पानी के स्रोत से बस्‍ती तक तीन किलोमीटर की दुर्गम यात्रा दिन में दो बार करते हैं। हर जानवर के ऊपर पानी के दो बर्तन लदे होते हैं। वहीं नानदरबार जिले में पीने के पानी की सप्‍लाई करने वाला केवल एक टैंकर है। पानी की समस्‍या से जूझ रहे दूसरे इलाकों में जिला प्रशासन ने निजी कुओं और पानी के दूसरे स्रोतों को अधिग्रहित कर लिया है।

 

 

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