सोशल मीडिया के जरिए सूचना साझा करने पर विचार

 नई दिल्ली। अब तक सोशल मीडिया से दूरी बनाकर चल रहा भारतीय रिजर्व बैंक भी मान रहा है कि मीडिया के इस स्वरूप को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। रिजर्व बैंक की इस अवधारणा में बदलाव दुनिया भर के 24 केंद्रीय बैंकों की सोशल मीडिया में भागीदारी के अध्ययन के बाद आया है। रिजर्व बैंक ने इसकी शुरुआत ऐसी सूचनाओं और जानकारी से की है जिन्हें वह अपनी वेबसाइट पर भी सार्वजनिक करता है।

रिजर्व बैंक मानता है कि आमतौर पर दुनिया भर के केंद्रीय बैंक सूचनाओं को सार्वजनिक रूप से साझा करने के मामले में काफी सावधानी बरतते हैं। अपनी सालाना रिपोर्ट में रिजर्व बैंक ने माना है कि लेकिन यह भी सच है कि सोशल मीडिया के जरिए जिस रफ्तार से सूचनाओं का प्रसार व प्रचार होता है उसे देखते हुए इस माध्यम को आज की तारीख में नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता। यही वजह है कि तमाम केंद्रीय बैंकों ने शुरुआत ऐसी ही सूचनाओं से की है जो सार्वजनिक तौर पर पहले से ही उपलब्ध हैं।सालाना रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया भर के 24 में से 22 केंद्रीय बैंक ऐसे हैं जो ट्विटर के माध्यम से केवल वही सूचनाएं अलर्ट के तौर पर साझा कर रहे हैं जो उनकी वेबसाइट पर मौजूद हैं। यानी बैंक ट्विटर के जरिए वेबसाइट पर उपलब्ध अपनी सूचनाओं की जानकारी आम जनता को दे रहे हैं। ज्यादातर बैंक जनता की तरफ से आने वाले ट्वीट पर प्रतिक्रिया भी व्यक्त नहीं करते। ट्विटर के अलावा यूट्यूब भी केंद्रीय बैंकों की तरफ से होने वाला सोशल मीडिया का लोकप्रिय चैनल है। 24 में से 18 बैंक ऐसे हैं जो ग्राहकों में जागरूकता और शिक्षा प्रदान करने वाली जानकारियां यूट्यूब पर साझा करते हैं। हालांकि कुछ केंद्रीय बैंक ऐसे हैं जो फेसबुक का इस्तेमाल जनता से फीडबैक लेने के लिए करते हैं। स्विस नेशनल बैंक अपनी मौद्रिक नीति पर फीडबैक लेने के लिए फेसबुक का इस्तेमाल करता है। सूत्रों के मुताबिक रिजर्व बैंक फिलहाल दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों के सोशल मीडिया के इस्तेमाल के अनुभव का अध्ययन कर रहा है। इसके बाद ही बैंक फैसला करेगा कि किस स्तर तक सूचनाओं को सोशल मीडिया के जरिए साझा करने के मामले में आगे बढ़ा जा सकता है।

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