राष्ट्रमंडल खेल में गोल्ड जीतने के बाद सायना नेहवाल ने भावुक होकर कही यह बात

एलायंस टुडे ब्यूरो

नई दिल्ली। सायना नेहवाल ने राष्ट्रमंडल खेलों से पहले खेल गांव में अपने पिता के ठहरने को लेकर उठे विवाद पर आवाज बुलंद करने के मुद्दे पर कहा कि उन्हें इस बात का कोई खेद नहीं है। सायना ने इस विवाद को लेकर कॉमनवेल्थ गेम्स से हटने की धमकी दे दी थी। वीमेंस सिंग्ल्स के फाइनल मुकाबले में सायना ने हमवतन और शीर्ष वरीयता प्राप्त पी वी सिंधू को हराने के बाद भावुक होते हुए कहाए मुझे अपने पिताजी के लिए कहीं भी किसी से भी भिड़ने में परहेज नहीं है। लोगों का कहना है कि मैंने अपने पिता को पहले रखा लेकिन ऐसा नहीं है। अगर ऐसा होता तो मैं अपने देश के लिए पदक नहीं जीतती।

मुझे पहले बताते तो होटल में कमरा बुक करवा देती

उन्होंने अपने पिता को खेल गांव में प्रवेश नहीं मिलने के संदर्भ में कहाए मुझसे क्यों कहा गया कि सारी व्यवस्था कर दी गयी है, जबकि ऐसा नहीं किया गया था। अगर मुझे पता होता तो मैं उनके लिए होटल में कमरा बुक करवा देती। उन्हें निजी कोच का मान्यता पत्र मिला था और लंबी यात्रा के बाद मुझे इस तरह की स्थिति से जूझना पड़ा। सायना ने कहा कि इससे उनका ध्यान भंग हुआ और इससे वह काफी तनाव में थीं। उन्होंने कहा कुछ दिन तक मैं सो तक नहीं पायी। मैं वहां तीन चार घंटे बैठे नहीं रह सकती थी। मैं सरकारी अधिकारी नहीं हूं। मैं एक खिलाड़ी हूं। हमें मैच खेलने होते हैं। सिंधू टीम स्पर्धा में नहीं खेल रही थी और मुझे वहां अच्छा प्रदर्शन करना था। कई बार चीजों को सामान्य होने में समय लगता है लेकिन मुझे लगता है कि अगर मैंने तब वैसा रवैया नहीं अपनाया होता तो ऐसा नहीं होता।

ऐसी स्थिति से आपको लड़ना पड़ा है

सायना ने कहाए वह दो दिन तक खेल गांव के बाहर बैठे रहे। वह यहां तक कि डाइनिंग हॉल तक नहीं आ पाए। उनके यहां आने का क्या मतलब था। यह तनावपूर्ण स्थिति थी लेकिन आपको इससे लड़ना होता है। मुझे विश्राम की जरूरत थी। रोजर फेडरर कहते हैं कि वह 10.12 घंटे सोते हैं और मैं आधे घंटे भी नहीं सो पायीए क्योंकि मेरे पिता बाहर बैठे हुए थे। मैं कैसे सो पाती।

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