रावण की पूजा के लिए साल में सिर्फ एक बार खुलता है ये मंदिर

बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व दशहरा शनिवार को पूरे देश में हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है. जहां आज यानी शनिवार के दिन भगवान श्रीराम की पूजा और आराधना हो रही है, वहीं कानपुर में एक ऐसा मंदिर भी जहां सुबह से ही लोग दशानन रावण की पूजा करते हैं. कानपुर के शिवाला इलाके में स्थित दशानन मंदिर में शनिवार सुबह से भक्त रावण की पूजा अर्चना करने के लिए उमड़ रहे हैं. ये मंदिर साल में एक बार विजयादशमी के दिन ही खुलता है और लोग सुबह-सुबह यहां रावण की पूजा करते हैं.दशानन मंदिर में शक्ति के प्रतीक के रूप में रावण की पूजा होती है और श्रद्धालु तेल के दिए जलाकर मन्नतें मांगते हैं. परंपरा के अनुसार शनिवार सुबह 8 बजे मंदिर के कपाट खोले जाते हैं और रावण की प्रतिमा का साज श्रृंगार किया जाता है. इसके बाद आरती होती है. शनिवार की शाम को मंदिर के दरवाजे एक साल के लिए बंद कर दिए जाते हैं.रावण के इस मंदिर के संयोजक केके तिवारी के मुताबिक कैलाश मंदिर परिसर में मौजूद विभिन्न मंदिरों में शिव मंदिर के पास ही रावण का मंदिर है. इसका निर्माण 120 साल पहले महाराज गुरू प्रसाद शुक्ल ने कराया था. तिवारी बताते हैं कि रावण प्रकांड पंडित होने के साथ-साथ भगवान शिव का परम भक्त था. इसलिये शक्ति के प्रहरी के रूप में यहां कैलाश मंदिर परिसर में रावण का मंदिर बनाया गया.

Share on

Leave a Reply