राज्यपाल ने लोक आयुक्त के वार्षिक प्रतिवेदन को मुख्यमंत्री को भेजा

एलायंस टुडे ब्यूरो

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक से लोक आयुक्त न्यायमूर्ति संजय मिश्रा ने राजभवन में भेंट कर 176 पृष्ठीय ‘समेकित वार्षिक प्रतिवेदन-2017’ प्रस्तुत किया। लोक आयुक्त से प्राप्त वार्षिक प्रतिवेदन को राज्यपाल ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेज दिया है। राज्यपाल ने मुख्यमंत्री को उक्त प्रतिवेदन प्रेषित करते हुए कहा है कि लोक आयुक्त तथा उप-लोक आयुक्त संगठन, उत्तर प्रदेश से प्राप्त उपरोक्त समेकित ‘वार्षिक प्रतिवेदन 2017’ आपको प्रेषित करते हुए आपसे अपेक्षा की जाती है कि लोक आयुक्त तथा उप-लोक आयुक्त संगठन के ‘वार्षिक समेकित प्रतिवेदन 2017’ पर मुझे राज्य सरकार का स्पष्टीकरण ज्ञापन उपलब्ध करायें ताकि उसे राज्य सरकार के स्पष्टीकरण ज्ञापन के साथ राज्य विधान मण्डल के दोनों सदनों के समक्ष प्रस्तुत करवाया जा सके।
लोक आयुक्त न्यायमूर्ति संजय मिश्रा ने अपने वार्षिक प्रतिवेदन में उत्तर प्रदेश लोक आयुक्त तथा उप-लोक आयुक्त अधिनियम 1975 की धारा 12(6) के अन्तर्गत वर्ष 2017 में विभिन्न मंत्रियों व लोक सेवकों आदि के विरूद्ध प्राप्त भ्रष्टाचार सम्बन्धी शिकायतों पर की गयी जांच से सम्बन्धित विवरण देते हुए लोक आयुक्त संगठन द्वारा प्राप्त शिकायतों पर अपनाई जाने वाली प्रक्रिया, प्रेषित किये गये विशेष प्रत्यावेदनों एवं लोक आयुक्त, उप-लोक आयुक्त द्वारा सौंपी गयी जांच रिपोर्टों पर राज्य सरकार द्वारा अब तक की गयी कार्यवाही आदि से अवगत कराया गया है। उक्त अधिनियम की धारा 12(7) की अपेक्षा के अनुसार लोक आयुक्त एवं उप-लोक आयुक्त संगठन से प्राप्त उपरोक्त ‘समेकित वार्षिक प्रतिवेदन 2017’ राज्य सरकार के स्पष्टीकरण ज्ञापन के साथ राज्य विधान मण्डल के दोनों सदनों के समक्ष प्रस्तुत किया जाना है।

राज्यपाल ने उत्तर प्रदेश सहकारी समिति (संशोधन) विधेयक 2017 पर अपनी सहमति दी

राम नाईक ने राज्य विधान मण्डल के दोनों सदनों से पारित ‘उत्तर प्रदेश सहकारी समिति (संशोधन) विधेयक 2017’ पर अपनी सहमति प्रदान कर दी है।
‘उत्तर प्रदेश सहकारी समिति (संशोधन) विधेयक 2017’ द्वारा पूर्व में अधिनियमित ‘उत्तर प्रदेश सहकारी समिति विधेयक 1965’ की धारा 29 एवं 31 सहित अन्य धाराओं में कतिपय संशोधन किये गये हंै। धारा 29 में संशोधन कर व्यवस्था की गयी है कि सहकारी समितियों की प्रबंध समिति के सदस्य कार्यकाल के अवसान के पूर्व यदि निर्वाचित नहीं किये जाते हैं या निर्वाचित नहीं किये जा सके तो ऐसी प्रबंध समिति का अस्तित्व अपनी अवधि के अवसान के पश्चात समाप्त हो जायेगा। सहकारी समितियों के प्रबंधन के लिए निबन्धक द्वारा एक अंतरिम प्रबंध समिति नियुक्त की जायेगी जो अपने गठन के छः माह अथवा प्रबंध समिति के निर्वाचन के पश्चात् समाप्त हो जायेगी। अंतरिम प्रबंध समिति समय-समय पर निबंधक द्वारा दिये गये निदेशों के अधीन रहते हुए प्रबंध समिति की शक्तियों का प्रयोग करेगी और कृत्यों का निष्पादन करेगी। धारा 31 में संशोधन कर समिति के कर्मचारियों की शक्तियाँ, कर्तव्य और दायित्वों जिसमें स्थानान्तरण, निलम्बन और अनुशासनात्मक कार्यवाही संस्थित करना है, से संबंधित उपबंधों को जोड़ा गया है। ज्ञातव्य है कि राज्यपाल ने पूर्व में 7 दिसम्बर, 2017 एवं 25 जनवरी, 2018 को उत्तर प्रदेश सहकारी समिति (संशोधन) अध्यादेश 2017 पर अपनी सहमति प्रदान की गयी थी। इस संबंध में विधेयक विधान मण्डल से पारित होकर अधिनियमित हुआ है।

राज्यपाल ने विधान परिषद सदस्यों के निर्वाचन की अधिसूचना  के लिए अनुमोदन किया

राज्यपाल राम नाईक ने उत्तर प्रदेश विधान परिषद के 13 निर्वाचित सदस्यों के स्थानों को भरने हेतु अधिसूचना जारी करने के लिए अपना अनुमोदन प्रदान कर दिया है। उत्तर प्रदेश विधान परिषद के 13 निर्वाचित सदस्यों का कार्यकाल 5 मई, 2018 को समाप्त हो रहा है। रिक्त सदस्यों हेतु द्विवार्षिक निर्वाचन की अधिसूचना 9 अप्रैल, 2018 को जारी होगी तथा 26 अप्रैल, 2018 को मतदान होगा। उल्लेखनीय है कि राज्यपाल अधिसूचना के माध्यम से राज्य विधान परिषद के रिक्त सदस्यों के स्थानों को भरने के लिए विधान सभा सदस्यों से अपेक्षा करते है कि राज्य की विधान परिषद के लिए रिक्त सदस्यों को निर्वाचित कर दें।

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