भारत बंदः दलितों का हिंसक प्रदर्शन, आज कई जगहों पर कर्फ्यू , यातायात सेवाएं ठप


एलायंस टुडे ब्यूरो

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के एससी-एसटी कानून में बदलाव के फैसले के विरोध में आज दलित संगठनों की ओर से देश भर में भारत बंद का आह्वान किया गया है। भारत बंद को कई राजनीतिक पार्टियों और कई संगठनों ने समर्थन भी दिया है। संगठनों की मांग है कि अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 में संशोधन को वापस लेकर एक्ट को पहले की तरह लागू किया जाए। दलित संगठनों के विरोध का सबसे अधिक बिहार, पंजाब, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, ओडिशा में देखने को मिला है। यहां प्रदर्शनकारियों ने न सिर्फ रेल रोका है बल्कि सड़क जाम कर परिवहन व्यवस्था को भी नुकसान पहुंचाया है। उत्तर प्रदेश में प्रदर्शनकारियों ने काफी उत्पात मचाया है और गाड़ियों को तोड़फोड़ कर उन्हें जला दिया है। इसके अलावा पुलिस चैकी में भी आग लगा दी है। राज्य सरकार के प्रवक्ता के अनुसार रैपिड एक्शन फोर्स और बीएसएफ की चार-चार बटालियन के अलावा बारह हजार पुलिसकर्मी कानून एवं व्यवस्था बनाये रखने के लिए सोमवार को तैनात किए जाएंगे। प्रवक्ता ने कहा कि सशस्त्र बलों और अर्धसैनिकों बलों आवश्यकता के मुताबिक किसी भी सहायता के लिए स्टैंडबाय पर रखा गया है। पंजाब सरकार ने भारत बंद के आह्वान के कारण समूचे राज्य में बस सेवाओं के साथ मोबाईल इंटरनेट, शॉर्ट मैसेज सर्विस और डोंगल सेवाएं बंद करने की घोषणा की है। एक सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि इस बंद के दौरान पंजाब सड़क परिवहन निगम (पीआरटीसी), पंजाब रोडवेज और पनबस की बसें नहीं चलेंगी। इसके अलावा रविवार को पांच बजे से ध्वनि कॉल को छोड़कर सभी मोबाइल इंटरनेट सेवाएं, सभी एसएमएस सेवाएं और सभी डोंगल सेवाएं भी बंद कर दी गई हैं जो रात 11 बजे तक बंद रहेंगी। सोमवार को पंजाब के जालंधर जिले में स्कूलों और कॉलेजों में छुट्टी की घोषणा की गई है। जालंधर के उपायुक्त वरिंदर कुमार शर्मा जिले के शैक्षणिक संस्थानों में छुट्टी की घोषणा की। उपायुक्त ने जारी आदेश में कहा है कि सोमवार को सभी सरकारी और निजी स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को बंद रखा जाएगा।

भारत बंद को कई संगठनों का समर्थन

एससी-एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के विरोध में अखिल भारतीय अनुसूचित जाति महासभा, भीम आर्मी समेत कई संगठनों ने सोमवार को भारत बंद की अपील की है। सर्वोच्च न्यायालय ने 20 मार्च को दिए एक फैसले में एससी-एसटी एक्ट में तत्काल गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी। दलित संगठनों की ओर से बुलाए गए इस बंद को कई राज्यों में कांग्रेस पार्टी समेत कई राजनीतिक दलों का भी समर्थन है। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने बंद को अपना समर्थन दिया है। चंडीगढ़ प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष प्रदीप छाबड़ा ने केंद्र सरकार से आज मांग की कि एससीध्एसटी एक्ट कानून संबंधी माननीय सुप्रीम कोर्ट के आए ताजा फैसले को देखते हुए पुर्नविचार याचिका दायर कर मजबूती से पक्ष रखे। छाबड़ा ने चंडीगढ़ के सभी एस सीध्एस टी से जुड़े नेता व कार्यकर्ताओं से अपना विरोध शांतिपूर्वक ढंग से दर्ज कराने की अपील की है।

इनसो का पूर्ण समर्थन

इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) की छात्र इकाई ने सोमवार को इंडियन नेशनल स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन (इनसो) ने आयोजित अनुसूचित जाति-जनजाति उत्पीड़न प्रतिरोधक कानून को कमजोर किए जाने के विरोध में ‘भारत बंद’ को पूर्ण समर्थन देने की मांग की। इनसो के अध्यक्ष दिग्विजय चैटाला ने आरोप लगाया कि केंद्र में बीजेपी नीत सरकार के तानाशाही रवैये के कारण संविधान खतरे में है। उन्होंने कहा कि इनसो का बाबासाहब के लिखे संविधान में पूरा विश्वास है इसलिए बंद उनके संगठन का पूरा समर्थन है

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