बिजली कर्मियों का आंदोलन वापस

एलायंस टुडे ब्यूरो

लखनऊ। प्रमुख सचिव (ऊर्जा) व विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के बीच हुए लिखित समझौते के बाद संघर्ष समिति ने निजीकरण के विरोध में पिछले 19 दिन से चल रहे प्रान्तव्यापी आन्दोलन को वापस ले लिया है।
उत्तर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्रीकान्त शर्मा की उपस्थिति में पावर कारपोरेशन प्रबन्धन से हुई वार्ता के बाद सौर्हादपूर्ण वातावरण में लिखित समझौते पर हस्ताक्षर किये गये। समझौते पर प्रबन्धन की ओर से प्रमुख सचिव (ऊर्जा) व अध्यक्ष उप्र पावर कारपोरेशन आलोक कुमार, प्रबन्ध निदेशक अपर्णा यू व निदेशक कार्मिक एसपी पाण्डेय ने हस्ताक्षर किये। संघर्ष समिति की ओर से शैलेन्द्र दुबे, राजीव सिंह, जीके मिश्रा, एके सिंह, गिरीश पाण्डेय, सदरूदद्ीन राना, सुहैल आबिद, विपिन प्रकाश वर्मा, राजेन्द्र घिल्डियाल, परशुराम, पीएन राय, पूसे लाल, एके श्रीवास्तव, महेन्द्र राय, शशिकान्त श्रीवास्तव, करतार प्रसाद, राम प्रकाश, जटाशंकर मिश्र, अंकुर भारद्वाज, संदीप अग्रवाल, ओपी सिंह, अजय द्विवेदी, शशांक चैधरी, राहुल सिंह, केएस रावत, पीएन तिवारी, आरएस वर्मा, डीके मिश्रा, पवन श्रीवास्तव, शम्भू रत्न दीक्षित, कुलेन्द्र प्रताप सिंह, मो इलियास ने हस्ताक्षर किये।

कोई निजीकरण नहीं किया जायेगा
लिखित समझौते के बिन्दु एक में लिखा गया है कि इन्टीग्रेटेड सर्विस प्रोवाइडर के लिए जारी की गयी निविदा (टेण्डर) प्रबन्धन ने वापस ले लिया है। उल्लेखनीय है कि रायबरेली, कन्नौज, इटावा, उरई, मऊ, बलिया और सहारनपुर के निजीकरण के टेण्डर गत फरवरी माह में किये गये थे जिन्हें मार्च माह में निजी क्षेत्र को हैण्ड ओर किया जाना था जो अब वापस ले लिये गये हैं।
लिखित समझौते के बिन्दु दो में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश में विद्युत वितरण निगमों की वर्तमान व्यवस्था में ही सुधार के लिए कर्मचारियों व अभियन्ताओं को विश्वास में लेकर सार्थक कार्यवाही की जायेगी। यह भी लिखा गया है कि कर्मचारियों व अभियन्ताओं को विश्वास में लिये बिना उत्तर प्रदेश में किसी भी स्थान पर कोई निजीकरण नहीं किया जायेगा।
समझौते में यह भी लिखा गया है कि अन्य लम्बित समस्याओं, द्विपक्षीय वार्ता द्वारा समाधान किया जायेगा और वर्तमान आन्दोलन के कारण किसी भी कर्मचारी व अभियन्ता के विरूद्ध किसी भी प्रकार की उत्पीड़न की कोई कार्यवाही नहीं की जायेगी।

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