नैमिषारण धाम में ललिता देवी मन्दिर में मां के दर्शन मात्र से पूरी होती हैं सभी मनोकामनाएं

-51 शक्तिपीठ धामों में ललिता देवी मन्दिर भी एक शक्तिपीठ

-इस स्थान पर गिरा था मां का हृदय

श्रीपा शर्मा-एलायंस टुडे ब्यूरो

लखनऊ। नवरात्र के पावन दिन ही पूरे देश में आदि शक्ति जगदम्बा की जयकारो की गूंज चारों ओर सुनाई देती है। मां के 51 शक्तिपीठों में से एक सीतापुर नैमिषारण में स्थित मां ललिता देवी का विशाल मंन्दिर है। इस मंदिर में वैसे तो पूरे श्रद्धालु भक्त दर्शन करने आते हैं, लेकिन नवरात्र के पावन दिनों में लाखों की संख्या में श्रद्धालु भक्त मां के चरणों में शीश झुकाने और उनसे आशीर्वाद प्राप्त करने व मनोकामनाएं पूर्ण कराने के लिए आते हैं।

यहां गिरा था मां का हृदय

पावन नैमिषारण धाम में मां सती का हृदय गिरा था। देवी भागवत के आधार पर नैमिश एक लिंग धारण करके एक शक्तिपीठ हृदय स्थल भी है। यह लिंग स्वरूप में भगवान शिव का पूजन होता है। नैमिष मां ललिता देवी के द्वार पर ही पंच प्रयाग तीर्थ विद्यमान हैं, इसलिए भी लिंग धारणी के ऊपर नाम में ललिता नाम प्रचलित है। कई स्थान¨ं पर ऐसा भी उल्लेख है कि चक्र की शक्ति रोकने के लिए मां शक्ति का प्राकट्य हुआ।

मनोकामना पूरी होने पर श्रद्धालु चढ़ाते हैं छत्र

जिन श्रद्धालु भक्तों की मनोकामना पूरी होती है वह सभी गाजे-बाजे के साथ नाचते हुए मां के दर पर आते हैं। उनके चरणों में शीश झुकाकर श्रद्धा-भक्ति भाव से सोने व चांदी के छत्र के अलावा सुन्दर चुनरी , नारियल आदि की भेंट मां के चरणों में अर्पण करते हैं।

मन्दिर में धार्मिक अनुष्ठान के साथ-साथ होते हैं भण्डारे

नैमिषारण धाम में बहुत से श्रद्धालु भक्त कई प्रकार के धार्मिक अनुष्ठान भी करते हैं, साथ ही साथ भण्डारे भी कराते हैं।

नैमिषारण के निकट स्थित है मां अष्टभुजा मंदिर

सीतापुर के मिश्रिख में विन्ध्याचल स्वरूपा मां अष्टभुजा दुर्गा का मंदिर नैमिषारण से मात्र सात किलोमीटर दूर स्थित है। दधीचि कुंड पर विराजमान इस अष्टभुजा दुर्गा मंदिर में मात्र मत्था टेकने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यह पावन नगरी महार्षि दधीचि की नगरी कहलाती है। इस मंदिर का उल्लेख दुर्गासप्तशती के एकादश अध्याय में मिलता है।

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