नये वित्त वर्ष में इनकम टैक्स के नियमों में होंगे बदलाव

एजेंसी

नई दिल्ली। नये वित्त वर्ष में इनकम टैक्स के कुछ नियम बदल जायेंगे। नए वित्त वर्ष यानी 1 अप्रैल 2018 से ही आयकर के कुछ नए नियम प्रभावी होने जा रहे हैं। इन नियमों का सीधा सरोकार देश के उन आम लोगों से है जो कि टैक्सपेयर्स भी हैं। यानी इन नियमों का असर आपकी कमाई पर भी पड़ेगा। ऐसे में आपके लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि आखिर 1 अप्रैल 2018 से कौन से नए नियम प्रभावी होने जा रहे हैं। शेयर्स की खरीद फरोख्त में हुए प्रॉफिट पर देना होगा स्ज्ब्ळ टैक्सरू 1 अप्रैल 2018 के बाद अगर आपको शेयर्स और इक्विटी वाले म्यूचुअल फंड के जरिए 1 लाख से अधिक का प्रॉफिट प्राप्त होता है तो आपको इसपर 10 फीसद का लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स (एलटीसीजी) देना होगा। हालांकि यह नियम सिर्फ लिस्टेड शेयर्स की बिक्री पर हुए मुनाफे पर ही लागू होगा। सिंगल प्रीमियम वाली हेल्थ पॉलिसी पर लगेगा टैक्सरू नए वित्त वर्ष से ही सिंगल प्रीमियम वाली हेल्थ पॉलिसी भी टैक्सेबल हो जाएगी। यानी सिंगल प्रीमियम वाली ऐसी पॉलिसी जिनका टर्म एक साल से अधिक का होगा उनपर भी अब टैक्स देनदारी बनेगी। हालांकि इसपर मिलने वाली टैक्स छूट कवर पीरियड के हिसाब से ही मिलेगी। यानी आपने जितने साल का कवर लिया होगा आपको उतनी ही छूट मिलेगी।

एक अप्रैल से बदल जाएंगे इनकम टैक्स से जुड़े 5 नियम

सरकारी बॉण्ड में निवेश करना होगा फायदेमंदरू अब नए वित्त वर्ष से सरकारी बॉण्ड में निवेश करना फायदे का सौदा बन जाएगा।यानी अगर आप सरकारी बॉण्ड में निवेश करेंगे तो आपको आयकर की धारा 54 के अंतर्गत लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स में छूट मिलेगी। नौकरीपेशा को मिलेगा स्टैंडर्ड डिडक्शन का फायदारू आम बजट 2018 में केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने नौकरीपेशा लोगों को स्टैंडर्ड डिडक्शन की सौगात दी थी। अब वेतनभोगियों को 40 हजार रुपए के स्टैंडर्ड डिडक्शन का फायदा मिलेगा। हालांकि अब उन्हें पहले की तरह ट्रांसपोर्ट अलाउंस और मेडिकल रीइंबर्समेंट की सुविधा नहीं मिलेगी। अब टैक्सपेयर्स को देना होगा बढ़ा हुआ सेसरू अब व्यक्तिगत करदाताओं के लिए इनकम टैक्स पर सेस बढ़ाकर 4 फीसद कर दिया है, पहले यह 3 फीसद हुआ करता था। यह नया नियम भी 1 अप्रैल 2018 से लागू हो रहा है। यानी अब आपको अपनी टैक्स देनदारी पर 4 फीसद स्वास्थ्य और शिक्षा उपकर देना होगा।

 

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