देश के 51 शक्तिपीठों में शामिल है उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी (सैनी) का शीतला कड़ा धाम

-इस स्थान पर गिरा था मां सती का हाथ, कहलाया कड़ा धाम
-वर्षभर विशेषकर नवरात्रों में उमड़ती है भक्तों की भीड़

एलायंस टुडे ब्यूरो
लखनऊ। देश के 51 शक्तिपीठों में कौशाम्बी (सैनी) का मां शीतला कड़ा धाम श्रद्धालु-भक्तों के लिए पूजा अर्चना व आस्था का केन्द्र है। इस मंदिर में देशभर के श्रद्धालु भक्त मां शीतला के दर्शन करने और मां से आशीर्वाद प्राप्त करने आते हैं।

यहां गिरा था मां सती का हाथ
पुराणों के अनुसार भगवान शिव की भार्या सती ने जब अपने पिता दक्ष के अपमान को सहन न कर पाने की स्थिति में यज्ञकुण्ड में कूदकर प्राण त्याग दिया, तो उनके वियोग से आक्रोशित भगवान शिव सती का शव लेकर तीनों लोकों में भ्रमण करने लगे। भगवान शिव के उग्र रूप को देखकर तीनों लोकों में हलचल मच गई। सभी प्राणी भयभीत हो गए, तब शिव के क्रोध से बचने के लिए भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से देवी सती के शव के 51 टुकड़े कर दिये। सती के शव के ये टुकड़े जहां भी गिरे, वही शक्तिपीठ कहलाये। यहां पर माता का हाथ गिरा था।

पाण्डु पुत्र युद्धिष्ठिर ने बनवाया था मां का मंदिर
माना जाता है कि द्वापर युग में वनवास के दौरान पाण्डु पुत्र युद्धिष्ठिर कड़ाधाम देवी दर्शन के लिए आये थे, उन्होंने गंगा स्नान के बाद गंगा के किनारे शीतला माता का मंदिर बनवाया। वर्तमान में देवी का मंदिर भव्य रूप ले चुका है।

शीतला धाम में भक्तों की सभी मनोकामनाएं होती हैं पूरी
शीतला माता का विश्व प्रसिद्ध मंदिर कड़े मानिकपुर में है। उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद से लगभग 75 किलोमीटर दूर उत्तर पश्चिम में कौशाम्बी जिले के (सैनी) सिराथू में ये प्राचीन मंदिर गंगा के किनारे विराजमान है। इस मंदिर में कड़े वाली माता (शीतला माता) के दर्शन मात्र से सभी मनोकामनाएं पूरी होने के साथ-साथ बड़े-बड़े संकट दूर हो जाते हैं।

मनोकामना पूरी होने के बाद कुण्ड को भरते हैं जल व दूध से
मंदिर परिसर में सभी भक्त जिनकी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं, दर्शन के बाद मंदिर में कुण्ड को जल व दूध से भरते हैं। मां की ऐसी असीम कृपा है कि ये कुण्ड कुछ ही बाल्टियों में भर जाता है। कई भक्त मनोकामनाएं पूरी होने के बाद सोने व चांदी की आंखें चढ़ाते हैं।

बच्चों के मुण्डन व अन्य धार्मिक अनुष्ठान होते हैं
मां शीतला की कृपा से श्रद्धालु-भक्त अपने बच्चों के मंुडन व धार्मिक अनुष्ठान भी करवाते हैं। इस पवित्र स्थान पर नवरात्रों में भव्य मेला भी लगता

अभिनेता व गायक मनोज तिवारी को मां ने दिये सपने में कन्या रूप में दर्शन

जब अभिनेता व गायक मनोज तिवारी शीतला कड़ाधाम में धार्मिक एलबम की शूटिंग करने आये थे तो उनकी तबीयत अचानक बहुत बिगड़ गई। सभी लोग बहुत चिंतित हो गये थे और उन्होंने मां शीतला के समक्ष मनोज तिवारी की तबीयत ठीक करने की प्रार्थना की थी, तब रात्रि में मां शीतला ने सपने में कन्या रूप में मनोज तिवारी को दर्शन दिये और उनके सिर पर हाथ फेरा। सुबह उठते ही मनोज तिवारी स्वस्थ हो गये। इस बात का जिक्र उन्होंने अपनी धार्मिक एलबम कैसेट में किया है।

सोमवार व शुक्रवार को होती है माता की विशेष पूजा
शीतला माता के दायें हाथ में झाडू होती है और बायें हाथ में पानी से भरा हुआ एक मटका होता है। सोमवार व शुक्रवार को माता की विशेष पूजा होती है। जिन बच्चों को चेचक व अन्य बीमारियां होती हैं, उन सबको मां शीतला बीमारी से मुक्ति दिलाती हैं।

नीम के पेड़ पर जल चढ़ाने से मां शीतला होती हैं प्रसन्न
सभी श्रद्धालु-भक्तों को मां शीतला को प्रसन्न करने के लिए रोज नीम के पेड़ पर जल चढ़ाना चाहिए और शाम के समय नीम के पेड़ के नीचे गऊ के घी का दीपक जलाना चाहिए। ऐसा करने से मां शीतला भक्तों पर प्रसन्न होती हैं।

 

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