तेलुगू देशम पार्टी ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) से तोड़ा नाता


एलायंस टुडे ब्यूरो

नई दिल्ली। आंध्र प्रदेश की तेलुगू देशम पार्टी ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) से नाता तोड़ दिया है। केन्द्र में दो प्रतिनिधियों के मोदी सरकार के कैबिनेट से इस्तीफे के एक हफ्ते बाद 16 सांसदों वाली टीडीपी ये यह फैसला किया है। एनडीए से अलग होने का टीडीपी का यह फैसला पार्टी पोलित ब्यूरो की बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया। आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा नहीं देने के चलते एन. चंद्रबाबू नायडू की अगुवाई वाली टीडीपी और अन्य स्थानीय पार्टियां केन्द्र सरकार से काफी नाराज हैं। हालांकि, एनडीए गठबंधन से टीडीपी का अलग होना केन्द्र के लिए कोई आश्चर्य की बात नहीं है क्योंकि दिल्ली में 8 मार्च को ही मोदी सरकार से टीडीपी के दो मंत्रियों ने इस्तीफा दे दिया था। गुरूवार को आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री नायडू ने वाई.एस.आर. कांग्रेस अध्यक्ष जगन मोहन रेड्डी के केन्द्र के खिलाफ लाए जा रहे अविश्वास प्रस्ताव को समर्थन देने का ऐलान किया था। आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग को खारिज करने के बाद यह अविश्वास प्रस्ताव लाया गया। एनडीए सरकार के कार्यकाल में ऐसा पहली बार है जब यह प्रस्ताव लाया गया। आंध्र पादेश के सीएम चंद्र बाबू नायडू ने कहा कि उन्होंने एनडीे से गठबंधन खत्म करने का फैसला जनता के हित के लिए लिया है। उन्होंने आगे कहा कि मैंने यह फैसला अपने फायदे के लिए नहीं बल्कि आंध्र प्रदेश की जनता के फायदे के लिए लिया है। चार साल तक मैंने अपनी ओर से सारे प्रयास किए और 29 बार दिल्ली भी गया। हर बार इस मामले पर चर्चा की। लेकिन जब केंद्र के पिछले बजट में भी आंध्र प्रदेश को शामिल नहीं किया गया, तब हमने अपने मंत्रियों को सदन से निकाल लिया। कांग्रेस के नेता शशि थरूर ने लोक सभा की कार्यवाही को स्थगित करने को लेकर कहा कि अविश्वास प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के लिए 50 सांसदों का समर्थन जरूरी होता है और 50 सासंद इसके समर्थन में भी थे लेकिन स्पीकर ने कहा कि इसको स्वीकार नहीं किया जा सकता है क्योंकि सदन में काम करने की स्थिती में नहीं है। तो मैं पूछना चाहता हूं कि सरकार को किस बात का डर है। तेलंगाना राष्ट्र समिती के सांसदों ने लोकसभा में हंगामें के कारण लोक सभा स्पीकर सुमित्रा महाजन सदन को सोमवार तक के लिए स्थगित कर दिया है। जदयू नेता केसी त्यागी ने कहा कि बड़े गठबंधन में विचारों के छोटे-छोटे मतभेद होते ही हैं। एनडीए की सरकार को कोई खतरा नहीं है। लेकिन टीडीपी का एनडीए से अलग होना दुर्भाग्यपूर्ण है। बीजेपी के टीडीपी पर पलटवार किया है। पार्टी के प्रवक्ता जीवीएल नरसिंहा रॉव ने कहा कि जनता की राय राज्य सरकार और टीडीपी के खिलाफ जा रही है। वे खुद को 2019 में हारते हुए देख रहे हैं और अपनी राजनीतिक जमीन खोती देख इसका दोष हम पर मढना चाहते हैं। यह भी सवाल उठता है कि आंध्र प्रदेश के सीएम को यह समझने में चार साल क्यों लगे कि गठबंधन काम नहीं कर पा रहा है। साथ ही उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश पार्टी का अगला त्रिपुरा होगा। टीडीपी के सांसद जयदेव गाल्ला ने कहा कि बीजेपी मे अपना गंदा खेल खेलना शुरू कर दिया है। बीजेपी ने जो तमिलनाडु में किया था वहीं आंध्र प्रदेश में करने की कोशिश कर रही है। वहां बीजेपी ने छोटी पार्टियों को भड़का कर बड़ी पार्टियों मे खलल पैदा की थी। अब वे यही रणनीति आंध्र प्रदेश में भी आजमा रहे हैं। कांग्रेस के प्रमुख जहमोहन रेड्डी ने कहा कि सत्ता में बैठी टीडीपी और चंद्रबाबू नायडू आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य के दर्जे के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ईएमआईएम के असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि उनकी पार्टी लोक सभा में अविश्वास प्रस्ताव को समर्थन करेगी। बीजेपी ने अपने वादे पूरे नहीं किए हैं। न तो युवाओं को रोजगार मिला और साथ ही मुस्लिस महिलाओं और अलपसंख्यकों के साथ अन्याय किया गया है। न्यूज एजेंसी से पहचान न बताने की शर्त पर एआईएडीएमके के एक नेता ने कहा कि अभी तय करना है कि पार्टी मोदी सरकार के खिलाफ लोक सभा में अविश्वास प्रस्ताव को समर्थन देगी या नहीं। सीपीआई के जनरल सेक्रेटी सीताराम येचूरी ने ट्वीट कर लिखा कि उनकी पार्टी टीडीपी के अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन करेगी। बीजेपी ने अपना वादा पूरा नहीं किया है। बीजेपी सभी मुद्दों पर नाकाम साबित हुई है और साथ ही संसदीय जबावदेही को टालती दिख रही है, इस पर गौर किया जाना चाहिए। कांग्रेसी नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने दिल्ली में कहा कि हम शुरुआत से ही आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने के पक्ष में रहे हैं। हम आध्र प्रदेश की जनता के लिए इंसाफ चाहते हैं। जब अविश्वास प्रस्ताव पारित किया गया है, तो सरकार की नाकामियों की बात होनी ही चाहिए। बीजापी प्रवक्ता जीवीएल नरसिंहा रॉव ने ट्विटर पर टीडीपी के फैसले को मक्कारी बताया है। इनके जाने से पार्टी को आंध्र प्रदेश में फलने-फूलने का मौका मिलेगा। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने टीडीपी का समर्थन किया। उन्होंने कहा- “मैं टीडीपी के एनडीए छोड़ने के फैसला का स्वागत करती हूं। मौजूदा स्थिति कदम का समर्थन करती हूं जिससे देश को आपदा से बचाया जा सके। मैं सभी राजनीतिक पार्टियों से यह अपील करती हूं कि वे अत्याचार, आर्थिक संकट और राजनीतिक अस्थिरता के खिलाफ एक साथ आएं। केन्द्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तर अब्बास नकवी ने कहा कि बीजेपी संसद सत्र के बाद आगे का फैसला करेगी। उन्होंने कहा- “हम देखते हैं संसद के अंदर क्या होता है, कौन सी पार्टी किसी रास्ते जाती है। यह चुनावी साल है और सभी राज्यों की अपनी मांगें और मुद्दे हैं। इस पर हमें टिप्पणी करना ठीक नहीं होगा। आंध्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष एन. रघुवीर रेड्डी ने कहा कि पार्टी केन्द्र के खिलाफ तेलुगू देशम पार्टी और वाईएसआर कांग्रेस की तरफ से लाए गए अविश्वास प्रस्ताव का पार्टी समर्थन करेगी। टीडीपी के नेता सीएम रमेश, तोता नरसिम्हन, रविन्द्र बाबू और अन्य ने नई दिल्ली में मीडियों को संबोधित कर बीजेपी को बताया- ‘ब्रेक जनता प्रोमिस’ आन्ध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री कार्यालय ने कहा- “आंध्र प्रदेश के साथ अन्याय के चलते टीडीपी ने एनडीए से अपना समर्थन वापस ले लिया है। टीडीपी अध्यक्ष चंद्रबाबू नायडू ने यह फैसला पार्टी पोलित ब्यूरो के सदस्यों और सासंदों के साथ इंमरजेंसी टेलीकॉन्फ्रेंसिंग में किया जिसका सबने एक राय से समर्थन किया। टीडीपी भी एनडीए सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लेकर आएगी। टीडीपी सांसद थोता नरसिम्हन ने कहा- हमारी पार्टी आज अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन कर रही है। हमने यह फैसला किया है कि हम एनडीए से अलग हो रहे हैं। आंध्र प्रदेश के मंत्री के.एस. जवाहर ने कहा कि बीजेपी ने तेलुगू लोगों को ठगा है, इसलिए पार्टी संसद में अविश्वास प्रस्ताव लाएगी। इस बीच, कांग्रेस ने गुरुवार को लोकसभा की कार्य मंत्रणा समिति का बहिष्कार किया। पार्टी का कहना है कि सरकार अलोकतांत्रिक रवैया अपना रही है और सदन पर अपनी मर्जी थोप रही है। पार्टी नेता केसी वेणुगोपाल ने कहा कि लोकसभा में वित्त विधेयक और विभिन्न मंत्रालयों एवं विभागों से संबंधित अनुदानों को बिना चर्चा के पारित कराया गया है। सरकार लोकतांत्रिक ढंग से आपसी सहमति से समाधान नहीं निकालना चाहती।

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