चैत्र नवरात्र 18 मार्च से

मंदिरों में सफाई, साज-सज्जा का काम जोरों पर

-हिन्दु नव वर्ष भी इसी दिन से शुरू होता है

एलायंस टुडे ब्यूरो

लखनऊ। चैत्र नवरात्र 18 मार्च से आरम्भ हो रही है। इस दिन हिन्दू नववर्ष भी प्रारंभ होता है। इसको लेकर मंदिरों में सफाई, सजावट का काम जोरों से चल रहा है।
सनातन धर्म में चैत्र नवरात्र व अश्विन नवरात्र में सभी भक्तगण आदि शक्ति जगदम्बा की आराधना नौ दिनों तक करते हैं। जगह-जगह माता के नवरात्र में दुर्गा सप्तशती का पाठ, माता के जागरण, देवी-भागवत आदि धार्मिक अनुष्ठान होते हैं।
सनातन धर्म में दो गुप्त नवरात्र भी होते हैं। पहली माघ मास के महीने में तथा दूसरी आषाढ़ मास के महीने में होती है। इन दोनों नवरात्रों में भक्तगण आदि शक्ति जगदम्बा की पूजा अर्चना करके उनके चरणों में हाजिरी लगाते है।

लखनऊ कैण्ट का प्रसिद्ध संसारी माता मंदिर
आज हम आपको राजधानी लखनऊ कैण्ट के मंगल पाण्डेय रोड पर स्थित संसारी माता मंदिर की महिमा के बारे में विस्तार से बता रहे हैं।

लखनऊ छावनी के मंगल पाण्डे रोड स्थित रामचरन का हाता कैण्ट, पिगरी के समीप मां संसारी का मंदिर श्रद्धालु भक्तों के लिए वर्षभर विशेषकर नवरात्रों के अवसर पर श्रद्धाभक्ति के साथ आकर्षण का केन्द्र बना रहता है।
ज्ञात हो कि मंगल पाण्डे रोड स्थित सड़क के किनारे मां संसारी की पूजा आजादी से पूर्व एक चबूतरे के रूप में तत्कालीन श्रद्धालु भक्त सैकड़ों की संख्या में धूप, अगरबत्ती व बताशे का प्रसाद चढ़ाकर मां की आराधना करते थे और जो भी मनोकामना मां के समक्ष करते थे, उनकी मनोकामना पूरी हो जाती थी। उस समय के मां संसारी के पुजारी रमई रामभगत प्रतिदिन मां की सेवा करते थे। मां की ऐसी असीम कृपा हुई कि दूर-दूर से श्रद्धालु भक्त मां के चरणों में हाजिरी लगाने आने लगे। 1970 के दशक में श्रद्धालु भक्तों के सहयोग से मंदिर का जीणोद्धार किया गया जिसके फलस्वरू संसारी माता का भव्य मंदिर बना और भक्तोें के सहयोग से पास में ही शिवाला बना जिसमें शिव परिवार के साथ बगल में बजरंगबली की प्रतिमा स्थापित की गयी।

संसारी माता की चालीसा व आरती की रचना
वर्ष 2000 में श्रद्धालु भक्तों के सहयोग से लखनऊ के प्रसिद्ध रचनाकार अशीष कुमार कंचन ने संसारी माता का चालीसा व स्वर्गीय अशर्फी लाल सेवक ने संसारी माता की आरती की रचना की जिन्हें श्रद्धालु भक्त प्रतिदिन श्रद्धा और भक्ति भाव से पढ़ते है। संसारी माता के मंदिर में स्थानीय महिलाएं पिछले तीन दषक से शीतला पूजा (लोटे की पूजा) करती हैं। इस पूजा में महिलाएं मंदिर प्रागंण में हलवा, पूड़ी आदि पकवान अपने हाथों से बनाकर सामूहिक भजन के उपरांत मां को अर्पण करती है और सर्वस्य के भले की प्रर्थना करती है। नवरात्र के दिनों में प्रातः और सन्ध्या के समय मां के भजन व जयकारों से आसपास का क्षेत्र भक्तिमय हो जाता है।

क्या कहते हैं लोग

‘जब मैं विवाह कर इस मोहल्ले में आई तब संसारी मां की पूजा इस चबूतरे के रूप में होती थी, तबसे आज तक माता ने मेरी सारी मनोकामनाएं पूरी की है। जो भी श्रद्धालु भक्त सच्चे मन से इस मंदिर में आते हैं उनकी सभी मनोकामनाएं माता पूरी करती हैं।’
-रामचरन का हाता कैण्ट पिगरी में रहने वाली 65 वर्षीय देवराजी देवी

‘संसारी माता ने मेरी हर मनोकामना पूरी की है।’
-पूर्व बैंक अधिकारी ओम प्रकाश

‘माता संसारी के दरबार में हर मनोकामना पूर्ण होती है और बड़े से बड़ा संकट टल जाता है।’
-छोटी लाल कुर्ती बाड़ा निवासी मीना

‘हम प्रतिदिन सुबह व षाम मां के चरणों में मत्था टेकते हैं।’
-छोटी लाल कुर्ती निवासी अजय कुमार व संतोष कुमार

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