चीन को इस तरह जवाब देने की तैयारी में भारत, रेल मंत्रालय की खास योजना

चीन और गुलाम कश्मीर की सीमा तक रेललाइन बिछाने की तैयारी चल रही है। इसके लिए भिलाई स्टील प्लांट (बीएसपी) को सिंगल लंबी रेल लाइन का ऑर्डर मिलने की उम्मीद है। रेल मंत्रालय से इसके संकेत मिले हैं। बीएसपी भी लंबी सिंगल रेल पटरी निर्माण पर फोकस कर रहा है। चीन सीमा पर भारत रेल चलाने जा रहा है। इसके लिए सर्वे चल रहा है, जो साल के अंत तक पूरा हो जाएगा। हिमाचल प्रदेश से लेह तक रेल चलते ही भारत चीन की सरहद पर मजबूत स्थिति में होगा।हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर से मनाली होते हुए लेह तक करीब 500 किलोमीटर तक रेललाइन बिछनी है। लेह से चीन की दूरी 250 किलोमीटर है। पहाड़ी इलाका होने से सेना के जवानों को भी खासी दिक्कतों से जूझना पड़ता है।चीन ने अपना रेल नेटवर्क तिब्बत तक फैला लिया है। करीब 1200 किलोमीटर लंबी किंघई-तिब्बत रेललाइन को ल्हासा तक पहुंचा दिया है। भारत से ल्हासा की दूरी 1500 किलोमीटर है। इसके बाद चीन सिक्किम तक पहुंचने की तैयारी कर रहा है।2006 के बाद ल्हासा के करीब ड्रोमो तक निर्माण किया गया, जो डोकलाम के नजदीक है। इसी का जवाब देने की तैयारी भारत कर रहा है।बीएसपी निर्मित रेल पटरी की क्षमता बर्फ, भूंकप और जंग से लड़ने लायक है। निकिल-कॉपर-क्रोमियम रेल पटरी पर पानी और बर्फ का असर नहीं होता। वहीं 130 मीटर लंबी सिंगल रेल पटरी से ट्रेन की बोगियों में झटके नहीं लगेंगे। रेल पटरी से हाइड्रोजन की मात्रा कम करने से इसमें दरार नहीं आती।बीएसपी के उच्चाधिकारियों का कहना है कि रेल मंत्रालय से संकेत मिले हैं कि सर्वे पूरा होते ही पटरी का ऑर्डर एक साल पहले ही दे दिया जाएगा, जिससे दुर्गम पहाड़ी इलाके में रेललाइन बिछाने में रुकावट न हो। वर्सनलेह लद्दाख सहित देश में अन्य दुर्गम स्थानों तक बिछने वाली रेल पटरियों की मांग से बीएसपी को फायदा होगा।
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