गौर पूर्णिमा की पूर्व संध्या पर गौ माताओं को कराया गया भोजन

लोक परमार्थ सेवा समिति के तत्वावधान में सदर बाजार में गौर पूर्णिमा श्री चैतन्य महाप्रभु के जन्मदिवस की पूर्व संध्या पर गौ माताओ को भोजन कराकर उनके चरणों में सबके भले की कामना की गई। समिति के उपसचिव जितेंद्र सिंह ने बताया कि कल गौर पूर्णिमा है।इस दिन श्री चैतन्य महाप्रभु का जन्म हुआ था।श्री चैतन्य महाप्रभु को भगवान कृष्ण का अवतार माना जाता है।इन्होंने  ही हरे कृष्णा महामन्त्र को आमजन तक पहुंचाया। श्री चैतन्य महाप्रभु ने ही 6 गोस्वामियों को कृष्ण भक्ति के लिए वृन्दावन भेजा था।आज भी वृन्दावन में 6 गोस्वामियों के मंदिरों में कृष्ण भक्ति  में श्रद्धालु लीन रहते है।  श्री चैतन्य महाप्रभु ने कहा था कि कृष्णा ही रस का सागर है।पूर्ण व शुद्ध श्रद्धा ही जीवो का सबसे बड़ा अभ्यास है । कृष्ण का शुद्ध प्यार ही सर्वश्रेष्ठ लक्ष्य है । सभी जीव भगवान के ही छोटे छोटे भाग है। कृष्ण ही सर्वश्रेष्ठ परम सत्य है।कृष्ण ही सभी ऊर्जाओं को प्रदान करता है ।जीव अपने तटस्थ स्वभाव की वजह से मुश्किलों में आते हैं।   श्री चैतन्य महा प्रभु के अनुसार भक्ति ही मुक्ति का साधन है।उनके अनुसार जीवो के दो प्रकार होते हैं । 1- नित्य मुक्त ।2 – नित्य संसारी।  नित्य मुक्त जीवो पर माया का प्रभाव नही पड़ता जबकि नित्य संसारी जीव मोह माया से भरे होते हैं।

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