आज के युवाओं के ‘लाइफ स्टाइल’ की तरह है फिल्म ‘दिल जंगली’ की प्रेम कहानी

एलायंस टुडे ब्यूरो

मुम्बई। दिल्ली की सुबह की गुनगुनी धूप की तरह फिल्म ‘दिल जंगली’ की प्रेम कहानी है। निर्देशक अलेया सेन ने फिल्म में आज के युवाओं के ‘लाइफ स्टाइल’ को पकड़ा है, जिससे प्रेम का अंदाज कुछ उजला-उजला सा नजर आया है। खैर यहां जो भी होता है, अच्छे के लिए होता है। किसी भी स्तर पर भावनाओं का वैसा उबाल नहीं है जो अक्सर प्रेम पर बनी फिल्मों में दिखाई देता है। इसमें फिल्म के संगीत की बड़ी भूमिका है। फिल्म की कहानी में कोरोली नायर (तापसी पन्नू) एक अमीर भारतीय बिजनेसमैन और ब्रिटिश मां की संतान हैं, जिसे सब कोरो कह कर पुकारते हैं। अपने पिता के अरमानों के विपरीत कोरो बिजनेस की पढ़ाई बीच में छोड़ कर भारत लौट आई है। यहां वह ब्रिटिश काउंसिल में अंग्रेजी टीचर है। इस अमीर लड़की की दुनिया साहित्य के ज्यादा करीब है जो जिंदगी के हरेक मसले को साहित्य की नजर से देखती है। सिर्फ अपने प्रेम करने वाले लड़के से शादी मना कर खुशी-खुशी जीवन जीना चाहती है। एक दिन अंग्रेजी क्लास में उसकी मुलाकात सुमित उप्पल (साकिब सलीम) से होती है, जो दिल्ली के लाजपत नगर में एक जिम ट्रेनर है और बॉलीवुड में हीरो बनने के सपने देखता है। अपनी अंग्रेजी सुधारने के लिए वह एक दिन मैडम कोरो से टकराता है। कोरो और सुमित के बीच दोस्ती बढ़ती है। वे अंग्रेजी पढ़ने-पढ़ाने के बहाने एक-दूसरे की आंखों में खुद के लिए प्रेम खोज लेते हैं। जिंदगी के डराते हालात, महत्वाकांक्षाओं से उनकी प्रेम कहानी में कई ट्विस्ट पैदा होते हैं। कोरो का सुमित को शादी के लिए मनाना, फिर खुद ही रिश्ता तोड़ कर आगे बढ़ जाना, प्रेम की जटिलता की झलक देते हैं। आखिर ‘ब्रेकअप’ के सात साल बाद कोरो लंदन में एक अच्छी बेटी की तरह पिता का बिजनेस संभाल लेती है। सुमित भी किसी फिल्म के प्रोजेक्ट से लंदन आता है। सुमित और कोरो को उनके हालात उन्हें एक बार फिर मिला देते हैं। अंत में सुमित कोरो को अहसास करा पाता है कि वह उससे प्यार करता है। ये दोनों बाहर की सारी परिस्थितियों को हरा कर आगे बढ़ जाते हैं। एक खुशनमा मोड़ पर फिल्म का अंत होता है, जिसे हम कई बार देख भी चुके हैं। इसे नया सिर्फ फिल्मांकन का अंदाज बनाता है। फिल्म की प्रेम कहानी को कॉलेज के दोस्तों के बीच चलने वाले नोंक-झोंक की तरह दिखाया गया है। इससे कहानी में गुनगुने प्रेम का आभास मिलता है। हालांकि, उसमें कॉमेडी की कोशिशें सहज नहीं लगती। कुछ घटनाक्रम सिर्फ प्रेम कहानी को हल्के-फुल्के अंदाज में बयां करने के लिए रखे गए हैं। ‘पिंक’ और ‘नाम शबाना’ जैसी फिल्मों से एक अलग पहचान बना चुकी तापसी पन्नू के अभिनय में नयापन नजर आता है। यकीनन, उनकी मौजूदगी फिल्म की जान है। अभिनेता साकिब सलीम ठीक दिखे हैं। बाकी अभिनेताओं ने फिल्म की जरूरत के अनुरूप ठीक-ठाक काम किया है। फिल्म का संगीत और सिनेमैटोग्राफी प्रभावित करते हैं, जो फिल्म की कहानी की जरूरत भी है। फिल्म के गीत ‘दिल जाने न’, ‘गजब का है दिन’ व ‘बीट जंगली’ लोगों को पसंद आएंगे। अपने गाने और गुनगुने प्रेम के अंदाज की वजह से यह फिल्म युवाओं को पंसद आएगी। दोस्तों और परिवार के साथ फिल्म को देखा जा सकता है।

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