अवैध शराब से मौत पर दोषियों को मृत्युदंड का प्रस्ताव मंजूर

लखनऊ। अवैध शराब से होने वाली मौतों के मद्देनजर योगी सरकार ने बेहद कड़ा कानून बनाने का फैसला किया है। अब अवैध विषाक्त शराब पीने से मौत पर दोषियों को मृत्युदंड, आजीवन कारावास के साथ ही 10 लाख रुपये का भारी-भरकम जुर्माना चुकाना पड़ेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आज कैबिनेट की बैठक में 107 वर्ष पहले अंग्रेजों के बनाये उत्तर प्रदेश आबकारी अधिनियम, 1910 की दंडक धाराओं को बेहद कड़ा बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। वैसे तो कैबिनेट से मंजूर संशोधन प्रस्ताव के बारे में सरकार द्वारा कोई जानकारी नहीं दी गई है लेकिन, सूत्रों के मुताबिक कड़े दंड के लिए अध्यादेश के माध्यम से अधिनियम की दो दर्जन ऐसी धाराओं में संशोधन प्रस्तावित है जिसमें सजा, दंड शुल्क और अधिकारियों के अधिकार का प्रावधान है। इसके साथ ही एक नई धारा भी प्रस्तावित है।

चूंकि इनदिनों विधानमंडल का सत्र नहीं चल रहा है इसलिए कैबिनेट की मंजूरी के बाद संबंधित प्रावधानों को अध्यादेश के माध्यम से लागू किया जाएगा। संशोधन संबंधी अध्यादेश को लागू करने के लिए उसे जल्द ही राज्यपाल के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। राज्यपाल की मंजूरी मिलते ही संबंधित कड़े प्रावधान लागू हो जाएंगे। सरकार का मानना है कि कठोर दंड होने पर शराब की तस्करी व अवैध शराब बनाने पर अंकुश लगेगा जिससे आबकारी राजस्व में भी इजाफा होगा। विदित हो कि पिछले वित्तीय वर्ष में सरकार को आबकारी से 14272 करोड़ रुपये मिले थे।

उल्लेखनीय है कि मौजूदा कानून में शराब की तस्करी करने से लेकर अवैध रूप से कच्ची देशी शराब बनाने वालों के खिलाफ न कड़ी सजा और न ही भारी-भरकम दंड शुल्क वसूलने की व्यवस्था है। ऐसे में बेखौफ शराब की तस्करी हो रही है जिससे सरकार को बड़े पैमाने पर आबकारी राजस्व का नुकसान भी हो रहा है। इतना ही नहीं ढीले-ढाले कानून के चलते धड़ल्ले से अवैध रूप से शराब भी बनाई और बेची जा रही है जिसके विषाक्त (जहरीली) होने पर आए दिन बड़ी संख्या में मौतें और स्थायी अपंगता भी हो रही हैं।

मृत्युदंड के लिए नई धारा

मौजूदा कानून से अवैध शराब के कारोबारियों को जहां छह माह तक ही जेल हो सकती है वहीं जुर्माना भी अधिकतम पांच हजार रुपये है। ऐसे में आबकारी एक्ट में नई धारा 60 (क) जोड़कर पहली बार ऐसी व्यवस्था प्रस्तावित है कि अवैध रूप से शराब की तस्करी एवं अवैध शराब के विषाक्त होने और उसको पीने से किसी की मृत्यु पर दोषियों को मृत्युदंड दिया जा सकेगा। इतना ही नहीं ऐसे गंभीर मामलों में दोषियों पर 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाने के साथ ही उन्हें आजीवन कारावास की कठोर सजा भी हो सकेगी।

 

मिलावटी शराब पर भी बढ़ेगी सजा व जुर्माना

अभी शराब में मिलावट पर छह माह का कारावास और दो हजार रुपये का अर्थदंड है। शराब में मिलावट पर कड़ाई से अंकुश लगाने के लिए नए कानून के तहत एक वर्ष की जेल और पांच से दस हजार रुपये तक का अर्थदंड प्रस्तावित है। अवैध रूप से मादक वस्तुओं को रखने, मादक वस्तुओं के अवैध आयात और परिवहन पर भी तीन वर्ष की सजा के साथ ही 25 हजार तक जुर्माना हो सकेगा। कंपाउडिंग धनराशि भी पांच हजार से बढ़ाकर एक लाख रुपये प्रस्तावित है।

कर्तव्यपालन में हीलाहवाली पर कठोर दंड

अफसरों को भी मिलेगा कठोर दंड अवैध शराब के कारोबारियों से मिलीभगत रखने वाले विभागीय अफसरों के कर्तव्यपालन में हीला-हवाली पाए जाने पर उन्हें भी अब कठोर दंड दिया जा सकेगा। कठोर दंड का प्रावधान होने से तलाशी आदि के मामले में जरा भी लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अफसरों के खिलाफ निलंबन और बर्खास्तगी तक की कार्रवाई हो सकेगी। हालांकि, गिरफ्तारी, निरुद्ध, जब्ती, सर्च वारंट और जमानती व गैर जमानती धाराओं आदि में संशोधन से अफसरों के अधिकारों में बढ़ोतरी भी होगी।

कैबिनेट के फैसलों की नहीं दी जानकारी

योगी सरकार की कैबिनेट की मंगलवार को बैठक हुई लेकिन फैसलों की जानकारी मीडिया को नहीं दी गई। ऐसा पहली बार हुआ जब सरकार ने इसे गोपनीय बना दिया। सूचना विभाग के निदेशक ने बताया कि बुधवार की दोपहर फैसलों की जानकारी दी जाएगी। विधानसभा सत्र के दौरान कैबिनेट के फैसलों की जानकारी सार्वजनिक तौर पर जारी करने के बजाय सदन में दी जाती है लेकिन, पहली बार ऐसा हुआ जब जानकारी नहीं दी गई। कहा गया कि एक दिन बाद बताएंगे।

एरियर के लिए करना होगा इंतजार

राज्य कर्मचारियों को सातवें वेतनमान के एरियर के लिए अभी कुछ और इंतजार करना पड़ेगा। योगी सरकार ने कर्मचारियों को एरियर देने के मामले को अक्टूबर की बजाय आगे बढ़ाने का फैसला किया है। सूत्रों के अनुसार सरकार कर्मचारियों को एरियर का भुगतान दिसंबर में कर सकती है। अखिलेश सरकार ने पिछले साल दिसंबर में राज्य कर्मचारियों को पहली जनवरी 2016 से सातवें वेतनमान का लाभ देने का फैसला किया था। कर्मचारियों को सातवें वेतनमान का भुगतान जनवरी 2017 से हुआ था। अखिलेश सरकार ने कर्मचारियों को जनवरी से दिसंबर 2016 तक के सातवें वेतनमान के एरियर का भुगतान दो समान वार्षिक किस्तों में करने का फैसला किया था। पहली किस्त का भुगतान अक्टूबर 2017 में किया जाना था। कैबिनेट के सामने यह प्रस्ताव आने पर राज्य सरकार की वित्तीय स्थिति को देखते हुए कर्मचारियों को एरियर के भुगतान को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी है। सूत्रों का कहना है कि कर्जमाफी के भारी-भरकम आर्थिक बोझ को देखते हुए सरकार ने एरियर भुगतान को आगे खिसकाने का फैसला किया है। वैसे निकाय चुनाव को देखते हुए यह भी कहा जा रहा है कि यदि वित्तीय सिथति ने इजाजत दी तो सरकार कर्मचारियों को एरियर का भुगतान पहले भी कर सकती हैै।

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