अपनी उपासना के लिए मानव को उत्पन्न किया ईश्वर ने

श्वर एक है और उसका कोई आकार नहीं है। वह निराकार है। उसकी महिमा असीम है और उस महान ईश्वर ने इस ब्रहमाण्ड की संरचना की इस ब्रहमाण्ड की संरचना कर सात आकाश और पृथ्वी की संरचना की और इन आकाशों में चमकते सितारे, ग्रहों व महान पिण्डों से सुसज्जित किया और अपनी सर्वश्रेष्ठ संरचना मानव को पृथ्वी पर भेजकर पृथ्वी पर अपना प्रतिनिधि शासक बनाया। इस मानव के लिए पृथ्वी पर विभिन्न आवश्यकताओं से परिपूर्ण पृथ्वी को सुसज्जित कर दिया और पृथ्वी की प्रत्येक वस्तु जीवनधारी व निर्जीव वस्तुओं को उसके अधीन कर मानव को पृथ्वी का शासक बना दिया और मानव को अपनी उपासना के लिए पैदा किया। हम सब मानव ईश्वर के आगे नतमस्तक और उपासक हैं और वही सर्वशक्तिमान ईश्वर उपासना के लायक हैं। इसी मानव को ईश्वर ने मानव आत्माओं की उत्पत्ति के बाद एक कलमा दिया।

लाई-लाहा-इल्लिाह मुहम्मदुर रसुल्लुलाह
(तर्जुमा-नहीं है कोई माबूद (उपास) सिवाय अल्लाह के और मोहम़्मद स0अ0 अल्लाह के रसूल हैं)

अर्थात मानव आत्माओं की संरचना के बाद ईश्वर ने हम सब मानवों से अपनी बंदगी (उपासना) का करार लिया था, वही करार प्रत्येक मानवों को पृथ्वी पर आने के बाद ईश्वर के समक्ष किये गये वादे को अपनाना होता है। आप हम सब पृथ्वी के मानव उस निराकार सर्वशक्तिमान ईश्वर की उपासना के लिए महाकृपालु ईश्वर ने समय-समय पर पृथ्वी के विभिन्न क्षेत्रों में मानव रूप अपने सर्वश्रेष्ठ ईष्ट दूत (रसूल, पैगम्बर, मनु, ऋषियों, मुनियों) को भेजा जो कि प्रत्येक युग में विभिन्न क्षेत्रों में मानवों को जीवन दर्शन दिया और जिन्होंने प्रत्येक युग के मानव को अल्लाह तआला (ईश्वर) की उपासना के लिए उपदेश दिया। इस प्रकार मानव शरीर को आध्यात्मिक और शारीरिक विकास के लिए विभिन्न रसूलों को मनुओं को ऋषियों, पैगम्बरों व नबियों को भेजा, जिन्होंने मानव समाज की अकेले एक सर्वशक्तिमान ईश्वर की इबादत के लिए उपदेशित किया। और अन्त में इस कलयुग में सर्वशक्तिमान ईश्वर (अल्लाह तआला) ने पूर्व कल्याणकारी जीवनयापन का सम्पूर्ण पाठ्यक्रम विश्व के मानवों के लिए अन्तिम सर्वश्रेष्ठ मनु, पैगम्बर हजरत मोहम्मद स0अ0 को पृथ्वी पर भेजा जिन्होंने ईश्वर के आदेशानुसार संसार के सभी मानवों को जीवन दर्शन दिया जिसका इशारा पृथ्वी पर अवतरित वेदों, पुराणों, पौराणिक ग्रंथों एवं कुरान में उल्लिखित है। जिन पर ईश्वर ने अन्तिम जीवन दर्शन पुस्तक कुरान करीम को अवतरित किया। इसी पाठ्यक्रम को पढ़ने से ही दुनिया में और आखिरत में भलाई है। यही जीवन दर्शन है।

(डा एमवाईएच खालिदी)

अध्यक्ष
आल इण्डिया इंसानियत मिशन

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