यूपी में राज्य कर्मचारी संगठन की महाहड़ताल आज से शुरू

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एलायंस टुडे ब्यूूरो

लखनऊ। पुरानी पेंशन बहाली को लेकर यूपी में राज्य कर्मचारी संगठन की महाहड़ताल आज से शुरू हो गई है। हड़ताल के पहले दिन समाज कल्याण निदेशालय सहित कई सरकारी दफ्तरों पर ताला लटका नजर आया। कामकाज बंद कर पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर सरकारी कर्मचारी और अधिकारी प्रदर्शन कर रहे हैं। हड़ताल की शुरुआत प्रयागराज के गवर्मेंट प्रेस से हुई। कर्मचारियों ने यहां सुबह छह बजे काम बंद कर प्रदर्शन किया। सरकार द्वारा एस्मा लगाने के बावजूद इस हड़ताल में 20 लाख कर्मचारी के शामिल होने का दावा किया जा रहा है। इससे पहले मंगलवार को राज्य कर्मचारियों व शिक्षकों ने सभी जिलों में बाइक रैली निकालकर सरकार को चुनौती दी थी। कर्मचारियों ने प्रदेश में लागू किए गए यूपी एस्मा से न डरने की हुंकार भी भरी। कर्मचारी, शिक्षक, अधिकारी पुरानी पेंशन बहाली मंच ने हड़ताल में करीब 150 संगठनों के 20 लाख कर्मचारियों व शिक्षकों के शामिल होने का दावा किया है। मंच के संयोजक हरिकिशोर तिवारी ने बताया कि 12 फरवरी तक चलने वाली सात दिन की हड़ताल के शुरुआती दिनों में बिजली व स्वास्थ्य सेवाओं को अलग रखा जाएगा, लेकिन आखिरी दिनों में सभी आवश्यक सेवाएं भी ठप कर दी जाएंगी। मंगलवार को लखनऊ सहित प्रदेश के सभी जिलों में ‘एक ही मिशन-पुरानी पेंशन’ की तख्तियां लेकर बाइक रैली निकाली और दफ्तरों का भ्रमण कर कर्मचारियों से हड़ताल में शामिल होने का आह्वान किया। हड़ताल के लिए नेताओं का संकल्प देख दोपहर तक तय हो गया कि सरकार चाहे जो रोक लगाए, लेकिन हड़ताल निश्चित रूप से की जाएगी। इस हड़ताल को लेकर शासन ने एस्मा लगाने के साथ ही कार्यवाही के निर्देश भी जारी कर दिए हैं कि किस स्थिति में कैसा कदम उठाया जाना चाहिए। मंगलवार देर रात मुख्य सचिव ने भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से अधिकारियों के साथ हड़ताल से निपटने पर विमर्श किया। अधिकारियों ने हड़ताल का असर न पड़ने देने की तैयारी की है। पुरानी पेंशन बहाली मंच के अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा व संघर्ष समिति के चेयरमैन शिवबरन सिंह यादव ने कहा कि कर्मचारियों ने इस मामले में सरकार को भरपूर समय दिया, लेकिन शासन में बैठे अधिकारियों की निष्क्रियता से कोई निर्णय नहीं हो सका है। हड़ताल के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए कर्मचारी नेताओं ने कहा कि हक मांगने के लिए आंदोलन हमारा लोकतांत्रिक अधिकार है, सरकार एस्मा लगाकर इसका दमन नहीं कर सकती। हड़ताल के पहले दिन राजभवन के सामने लोक निर्माण विभाग मुख्यालय पर सभी विभागों के कर्मचारी, शिक्षक, अधिकारी व केंद्रीय कर्मचारी एकत्र होकर धरना प्रदर्शन करेंगे।

अन्य जिलों में भी इसी तरह धरने और सभाएं आयोजित की जाएंगी। सभी जिलों में 50-50 मोटरसाइकिल सवारों की दो टोलियां जनजागरण करते हुए ब्लॉक मुख्यालयों तक जाएंगी। वहीं, कर्मचारी शिक्षक संयुक्त मोर्चा ने बुधवार से पुरानी पेंशन के लिए होने जा रही हड़ताल में शामिल न होने का निर्णय लिया है। मोर्चा अध्यक्ष वीपी मिश्र ने बताया कि 21 संबद्ध संगठनों के लाखों सदस्य भी हड़ताल से अलग रहेंगे। मंगलवार को मुख्य सचिव के साथ वार्ता के बाद मोर्चा पदाधिकारियों ने नई पेंशन योजना का स्वागत करते हुए कहा कि योजना का संशोधित आदेश कर्मचारियों के हित में है। मोर्चा ने मुख्य सचिव से लोकसभा चुनाव से पहले प्रदेश में आदेश का क्रियान्वयन शुरू कराने का आग्रह किया। उन्होंने बताया कि नये आदेश के तहत पेंशन में सरकार का अंशदान 10 से बढ़ाकर 14 फीसद किया गया है। इसे कर्मचारियों के एकाउंट में जल्द जमा कराने की मांग की गई। नई पेंशन योजना के संशोधित आदेश के तहत कर्मचारियों को अंतिम वेतन के 50 फीसद से अधिक पेंशन मिलेगी, वहीं मृतक आश्रित को नौकरी, ग्रेच्युटी व पारिवारिक पेंशन सहित अन्य सुविधाएं भी मिलती रहेंगी। कर्मचारियों को शेयर बाजार में रकम न लगाने की छूट है, जबकि अग्रिम निकासी पर आयकर भी नहीं लगेगा। राज्य सरकार नई पेंशन योजना (एनपीएस) में अपना अंशदान बढ़ाएगी। एनपीएस में राज्य सरकार का अंशदान 10 से बढ़ाकर 14 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है, जिसे कैबिनेट बैठक में मंजूरी दी जा सकती है। एनपीएस पहली अप्रैल 2005 से लागू है। इसके तहत कर्मचारियों के 10 प्रतिशत वेतन की हर महीने पेंशन के लिए कटौती होती है। इतना ही योगदान राज्य सरकार भी करती है। केंद्र ने नई पेंशन योजना के तहत अपने योगदान में चार फीसद का इजाफा किया है। केंद्र की तर्ज पर राज्य सरकार भी अब ऐसा करने जा रही है। वर्ष 2005 से अब तक राज्य के हिस्से का जो अंशदान नहीं जमा हुआ है, उसे भी सरकार ब्याज समेत जमा कराने का प्रस्ताव है।

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