सूचना आयुक्तों के पद पर गैर राजनयिक लोगों को भी रखा जाए-सुप्रीम कोर्ट

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एलायंस टुडे ब्यूरो

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय सूचना आयुक्त (सीआइसी) और राज्य सूचना आयुक्तों (एसआइसी) की रिक्तों को जल्द भरने के लिए कई दिशा-निर्देश जारी किए हैं। साथ ही कहा कि कोई पद रिक्त होने के एक से दो महीने के भीतर ही उसे भरा जाना चाहिए। साथ ही यह भी हिदायत दी कि मुख्य चुनाव आयुक्त की तरह ही केंद्रीय सूचना आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया होनी चाहिए। सूचना आयुक्तों के पद पर परदर्शी प्रक्रिया के तहत गैर राजनयिक लोगों को भी रखा जाए।
जस्टिस एके सीकरी और एसए नजीर की खंडपीठ ने शुक्रवार को कहा कि मुख्य सूचना आयुक्त का पद ऊंचे दर्जे का है। इसलिए सीआइसी की नियुक्ति भी उन्हीं नियम शर्तो पर की जानी चाहिए जिस पर एक मुख्य चुनाव आयुक्त की होती है। सर्वोच्च अदालत ने सीआइसी और एसआइसी की मौजूदा रिक्तियों की ओर इशारा करते हुए सरकार को निर्देश दिया कि इन्हें छह माह के अंदर भरा जाए।
इससे पहले सर्वोच्च अदालत ने केंद्र सरकार से पूछा कि सूचना आयुक्तों की नियुक्ति के लिए चयन समिति केवल सेवानिवृत्त या मौजूदा राजनयिकों का ही चयन क्यों करती है। खंडपीठ ने कहा कि केंद्र और राज्यों के चुनाव आयुक्तों को समाज के अन्य वर्गो से भी नियुक्त किया जाना चाहिए। उनकी नियुक्ति को केवल सेवारत या सेवानिवृत्त राजनयिकों तक ही सीमित नहीं रखना चाहिए। जस्टिस सीकरी ने कहा कि सूचना आयुक्तों की चयन समिति को उम्मीदवारों की छंटनी करने का एक तय पैमाना होना चाहिए। इसके सुशासन पर पड़ने वाले प्रभाव का संकेत देते हुए कोर्ट ने कहा कि जहां कहीं भी चयन प्रक्रिया चल रही है, उसे एक या दो महीने में पूरा किया जाना चाहिए।

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