Elections 2019: चंदा जुटाने में लगी पार्टियां

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एलायंस टुडे ब्यूरो

लखनऊ। एसएमएस और वॉट्सऐप के साथ ट्विटर और फेसबुक पर लोकसभा चुनाव का खूब प्रचार होने लगा है। बीजेपी तो मंत्रियों-विधायकों और सांसदों से एक-एक महीने का वेतन-भत्ता ले रही है, वहीं कांग्रेस ने वेबसाइट पर आनलाइन डोनेशन देने का विकल्प खोल दिया है। बीएसपी और एसपी भी कार्यकर्ताओं के जरिए पार्टी फंड जुटा रहे हैं। चुनाव से पहले हर दल ने बाहरी लोगों के लिए मदद का विकल्प भी खोल दिया है।

चंदा जुटाने के लिए कांग्रेस ने साधा मोदी पर निशाना

कांग्रेस ने केंद्रीय कार्यालय से लोकसभा चुनाव के लिए फंड जुटाने की कवायद शुरू कर दी थी। बीते सितंबर में कांग्रेस के आलाकमान ने खर्चों में कटौती करके कोष में बचत करने के निर्देश जारी किए थे। इसके बाद कार्यकर्ताओं से एक-एक बूथ पर घर-घर जाकर फंड जुटाने को कहा। वरिष्ठ नेताओं को बारकोड और होलोग्राम वाले कूपन भी चंदा लेने के लिए दिए गए। पार्टी ने अपने फेसबुक पेज से जुड़े लोगों को संदेश भी भेजा है उस संदेश में यह लिखा है की मोदी तो राफेल से पैसा जुटा रहे हैं, हमें मोदी से लड़ने के लिए फंड की जरूरत है।

प्रदेश कांग्रेस के कोषाध्यक्ष नईम का कहना है कि फंड जुटाने की सारी कार्रवाई केंद्रीय संगठन से होती है। हम केवल मेंबरशिप ड्राइव चलाते हैं। समय-समय पर सदस्यता अभियान चलाए जाते हैं। कांग्रेस में शामिल होने वाले सदस्यों से पांच रुपये शुल्क लिया जाता है। पार्टी को फंड ऑनलाइन डोनेट किया जा सकता है।

बीजेपी ने चंदे को दिया समर्पण राशि का नाम

बीजेपी ने चुनावी चंदे को समर्पण राशि का नाम दिया है। सभी मंत्रियों,विधायकों, सांसदों से एक महीने का वेतन-भत्ता लेने के अलावा संगठन महामंत्री सुनील बंसल ने कार्यकर्ताओं और जनसामान्य से भी समर्पण राशि लेने को कहा है। उन्होंने इसके लिए सभी क्षेत्रीय प्रभारियों, अध्यक्षों, संगठन मंत्रियों और जिलाध्यक्षों को पत्र भी भेजा है। धन संग्रह का यह अभियान 17 मार्च तक चलेगा। इसमें कार्यकर्ता घर-घर जाकर पार्टी के लिए सहयोग करने की अपील कर रहे हैं। इसके लिए बाकायदा व्यापारियों और प्रतिष्ठित व्यक्तियों की सूची बनाई गई है। यह सारी धनराशि चेक से ली जानी है। अगर कोई 20 हजार से ज्यादा चंदा देता है तो उसके लिए पैन नंबर भी देना जरूरी है।

बीजेपी प्रवक्ता डॉ. चंद्र मोहन ने बताया किबीजेपी कार्यकर्ता आधारित पार्टी है, इस वजह से हम समर्पण राशि के जरिए लोगों से सहयोग ले रहे हैं। सारी धनराशि चेक से ली जा रही है। इसके अलावा नमो ऐप के जरिए कोई भी समर्थक पार्टी की मदद कर सकता है। इससे पहले पार्टी ने हर बूथ पर गुल्लक के जरिए भी धनराशि इकट्ठा की थी।

बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं के जरिए चंदा ले रही बीएसपी

बीएसपी अपने बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं के जरिए है। उन्हें चुनाव से पहले ही हर जिले में जिलाध्यक्षों के माध्यम से पर्चियां दी गई हैं। इसमें कोई धनराशि नहीं तय की गई है, बीएसपी के कार्यकर्ता बूथ स्तर तक लोगों के बीच जा रहे हैं और पर्चियां काट रहे हैं। इन पर्चियों के माध्यम से जो भी धनराशि इकट्ठा होगी, वह जिलाध्यक्षों के माध्यम से ही वापस पार्टी कोष में जमा होती है। स्थानीय स्तर पर जहां चुनावी रैलियां, कार्यक्रम और प्रचार होंगे। इसमें अधिकांश खर्च प्रत्याशी खुद उठाएगा। पार्टी भी अपने कोष से कुछ मदद करेगी। पार्टी सुप्रीमो मायावती भी खुद स्वीकार कर चुकी हैं कि उन्हें पार्टी के कार्यकर्ता दान देते रहते हैं। उन्होंने नोटबंदी के दौरान जब बैंक में पैसा जमा किया तो बताया भी था कि यह सारी धनराशि पूरे देश से मिले कार्यकर्ताओं से उन्हें मिली है।

विधायकों के जरिए एसपी ले रही चंदा

समाजवादी पार्टी ने अधिकांश कोष सदस्यता शुल्क से जमा किया है। पार्टी सदस्यता शुल्क के रूप में 25 रुपए लेती है। एक सक्रिय सदस्य बीस सदस्य बनाता है तो वह पार्टी कोष में 500 रुपए सदस्यता शुल्क और 1000 रुपए सक्रिय सदस्यता शुल्क अपने पास से यानी कुल 1500 रुपए जमा करता है। सदस्यता का यह अभियान लगातार चलता रहता है। इसके अलावा पार्टी के एमएलसी, विधायक भी 25 हजार से लेकर अपनी क्षमता के अनुसार शुल्क जमा करते हैं।
एसपी प्रवक्ता और एमएलसी उदयवीर सिंह ने बताया किसदस्यता शुल्क के अलावा चुनाव लड़ने के दौरान स्थानीय नेता प्रत्याशियों की मदद करते हैं। कई बार लोग चंदा न देकर गाड़ी और संसाधनों से प्रत्याशी की मदद करते हैं। पार्टी भी प्रत्याशियों की इस तरह से मदद करती है।

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