शरीर को अधिक चलाएं, मन को चंचल होने से बचायें

एलायंस टुडे ब्यूरो

लखनऊ। शरीर से जितना परिश्रम करेंगे, शरीर उतना फुर्तीला होगा और मन को जितना नियंत्रित रखेंगे उतना एकाग्र होगा और ईश्वर के चरणों में लगेगा। छावनी क्षेत्र सदर स्थित हाता राम दास में श्रीमद्भागवत कथा के पहले दिन श्री श्री देवेश अवस्थी जी महाराज ने कथा सुनाते हुए यह बात कही।
उन्होंने ब्रह्म, जीवात्मा व माया के बारे में कहा कि लोग माया के प्रभाव में रहकर खुद व ब्रह्म को भूल जाते हैं। यही दुख का कारण है। जीवन में पूर्ण आनंद के लिए ब्रह्म से जोड़ना जरूरी है। इससे पहले इस धार्मिक आयोजन के प्रातःकालीन सत्र में आचार्य विद्वानों द्वारा पूजन कार्यक्रम व यज्ञ किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य यजमान सुनील कुमार वैश्य के साथ उनकी पत्नी सीमा वैश्य के अलावा सैकड़ों की तादाद भक्त शामिल हुए। कार्यक्रम में मुख्य संयोजक राजेन्द्र पांडेय गुरु जी भी मौजूद थे।

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