मां चंद्रिका देवी मंदिर-श्रद्धालु-भक्तों के लिए आस्था का केंद्र

 

-प्रत्येक अमावस्या व नवरात्रों में उमड़ती है भक्तों की भीड़

एलायंस टुडे ब्यूरो

लखनऊ। राजधानी के ग्रामीण क्षेत्र बख्शी का तालाब से लगभग 11 किलोमीटर दूर कठवारा गांव में मां चन्द्रिका देवी का भव्य मंदिर है। यह मंदिर पूरे वर्ष भर विशेषकर अमावस्या व नवरात्रों के दिनों में श्रद्धालु-भक्तों के लिए पूजा-अर्चना व आस्था का केंद्र बना रहता है। इस मंदिर में प्रत्येक अमावस्या को मेला भी लगता है। मां के प्रति श्रद्धालु भक्तों की विशेष आस्था है। मंदिर में मां के दर्शन के बाद भक्तगण मंदिर परिसर में चुनरी बांधकर अपनी मनोकामना मां के समक्ष रखते हैं, जब उनकी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं तो वह चुनरी की गांठ खोलकर नाचते-गाते हुए अपने घरों को लौटते हैं। मंदिर से काफी दूर तक सजी दुकानें व भव्य सजावट आने वाले भक्तों के लिए आकर्षक का केंद्र रहती हैं।

मां चन्द्रिका देवी के मंदिर का इतिहास
अठारहवीं सदी के पूर्वार्द्ध से यहां मां चंद्रिका देवी का भव्य मंदिर बना हुआ है। यह मंदिर लखनऊ के प्रसिद्ध व ऐतिहासिक मंदिरों में से एक है। लोगों को इस मंदिर के प्रति अपार आस्था है। कहा जाता है कि गोमती नदी के समीप स्थित महीसागर संगम तीर्थ के तट पर एक पुरातन नीम के वृक्ष के कोटर में नौ दुर्गाओं के साथ उनकी वेदियां चिरकाल से सुरक्षित रखी हुई हैं।

गांव वालों के अनुसार पांडव अपने वनवास के समय द्रौपदी के साथ इस तीर्थ पर आए थे और अश्वमेघ यज्ञ कर घोड़ा छोड़ा था, जिससे इस क्षेत्र के तात्कालिक राजा हंसध्वज द्वारा रोके जाने पर युद्धिष्ठिर से उन्हें युद्ध करना पड़ा था। युद्ध के समय एक पुत्र सुधन्वा का माता के मंदिर में पूजा अर्चना करते रहने की वजह से उसे खौलते तेल में डाल दिया गया था। मां की कृपा से उसके शरीर पर कोई आंच नहीं आई थी।

मंदिर के पास बने महिसागर तीर्थ की भी अपनी मान्यता है। लोगों के अनुसार इस तीर्थ में घटोत्कच के पुत्र बर्बरीक ने तप किया था। ये तीर्थ मनोकामना पूर्ति व पापों को नाश करने के लिए माना जाता है।

मंदिर प्रांगण में श्रद्धालु कथा सुनने के साथ-साथ कराते हैं बच्चों के मुंडन व अन्य धार्मिक अनुष्ठान

मां चद्रिका देवी की कृपा से जिन भक्तों की मनाकामना पूर्ण हो जाती है वे सभी मां चंद्रिका देवी के दर्शन के उपरांत सत्य नारायण की कथा सुनते है तथा अपने बच्चों का मुंडन कराने के साथ-साथ अन्य धार्मिक अनुष्ठान भी कराते हैं। प्रत्येक अमावस्या व समय-समय पर श्रद्धालु भक्त भंडारा भी करते हैं।

क्या कहते हैं भक्त
मां चन्दिका देवी के मंदिर में महीने में एक बार अवश्य जाती हूं। मां की कृपा से मेरी सभी मनोकामनाएं पूरी हुई हैं। मां के प्रति मेरी पूर्ण आस्था है। जब भी मेरे पर कोई संकट आता है तो उनको सच्चे मन से याद करने पर संकट दूर हो जाता है।

-श्रीपा शर्मा, सदर, कैंट, लखनऊ

मैं मां चन्दिका देवी के दर पर तब से  जाती हूं जब हम सबको बख्शी का तालाब से मां के दरबार तक तांगे से जाना पड़ता था। मां मुझे हर अमावस्या को बुलाती हैं।

-निर्मला, एल्डिको कालोनी, रायबरेली रोड, लखनऊ।

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