बकायेदार किसानों को पकड़ने निकले बैंक के ‘अमीन’

-किसानों को अखर रही है राजनेताओं की वादाखिलाफी

एलायंस टुडे ब्यूरो

गोंडा। कर्जदार किसानों को अब राजनेताओं की वादाखिलाफी अखर रही है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है की बैंकों ने वसूली अभियान तेज कर दिया है जिससे बकाएदार किसान घर छोड़ने को विवश हैं। बजाज हिन्दुस्थान शुगर मिल के पास किसानों का बकाया है। प्रशासनिक अधिकारी इस ओर नजर नहीं डाल रहे हैं।
जिला मुख्यालय सहित सभी इलाकों बाजारों के बैंकों ने बैंक के बकाएदार किसानों पर कार्रवाई तेज कर दिया है। इनमें कोई एक बैंक नहीं, बल्कि सभी बैंक हैं। बैंकों के मैनेजर बताते हैं कि अधिकारियों की सख्ती के कारण ऐसा हाल है। ऊपर से निर्देश मिला है कि जितने एनपीए खाते हैं सभी की आरसी जारी करने का निर्देश दिया है। इसके बाद कार्रवाई में तेजी आई है। बैंक शाखाओं से जारी आरसी के बाद सुबह से ही वसूली के लिए अमीन व तहसीलदार की गाड़ियां गांवो के लिए रूख कर देती हैं जिससे किसानों को घर छोड़कर भागना मजबूरी बना हुआ है।
वसूली में सख्ती किसी एक बैंक की ओर से नहीं बल्कि सभी बैंक शामिल हैं। इसमें पीएनबी, सर्व रूपी ग्रामीण बैंक, इलाहाबाद बैंक, यूनियन बैंक, एसबीआई बैंक, बैंक आफ बड़ौदा, सहकारी भूमि विकास लिमिटेड, ओरियंटल बैंक आफ कामर्स शामिल हैं। इन बैंकों की सख्ती के बाद और गांवों में लगातार बढ़ रही वसूली के लिए अधिकारियों की चहलकदमी ने बकाएदारों की परेशानी बढ़ा दी है।
किसानों का आरोप है कि चुनाव के दंौरान विभिन्न राजनीतिक दलों की ओर से वादा चुनाव सभाओं में किया गया था कि चुनाव बाद बकाएदारों के कर्ज की माफी कर दी जाएगी जिससे किसानों ने बकाया माफी होने पर भरोसा किया लेकिन कर्ज माफी में ऐसे नियम बनाए गए कि नाम मात्र किसान दायरे में आएं।

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