नई दिल्ली के राम लीला मैदान में होगी गऊ माता को राष्ट्रमाता बनाने के लिए विशाल रैली


एलायंस टुडे ब्यूरो

लखनऊ। नई दिल्ली के रामलीला मैदान में गऊ माता को राष्ट्र माता बनाने के लिए भारतीय गऊ क्रांति मंच के संस्थापक गोपालमणि के सानिध्य में विशाल रैली 18 फरवरी को होगी। इस रैली में देश भर के लाखों की संख्या में गऊ भक्तों के शामिल होने की संभावना है।

वर्ष 2014 व 2016 में भी कर चुके हैं गऊ माता को राष्ट्र माता बनाने के लिए रैलियां
भारतीय गऊ क्रांति मंच के संस्थापक गोपाल मणि ने वर्ष 2014 में भी विशाल रैली की थी। इसके बाद वर्ष 2016 में नई दिल्ली के रामलीला मैदान में विशाल रैली की, जिसमें सांसद हेमा मालिनी के अलावा आचार्य देवकी नन्दन ठाकुर जी महाराज के साथ-साथ कई साधु महात्माओं सहित लाखों की संख्या में गौ भक्त इकट्ठे हुए थे। रैली के तुरंत बाद 18 दिनों तक नई दिल्ली में जंतर-मंतर पर धरना भी दिया गया था।

देश के सभी जिलों में आयोजित की गऊ गोष्ठी
गोपाल मणि ने भारत वर्ष के सभी राज्यों में जाकर प्रत्येक जिले में गौ गोष्ठी आयोजित की और गौ भक्तों को नई दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित होने वाली रैली मेें अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया।

गोपाल मणि की प्रेरणा से उत्तर प्रदेश में भी गऊ माता को राज्य माता बनाने की मांग हुई तेज
भारतीय गऊ क्रांति मंच के संस्थापक गोपाल मणि की प्रेरणा से उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में लोक परमार्थ सेवा समिति ने गौ माता को राष्ट्र माता घोषित किये जाने के लिए समिति की उपाध्यक्षा श्रीमती किरन बाला शर्मा ने राज्यपाल, मुख्यमंत्री, उ0प्र0 के समस्त कैबिनेट मंत्री, राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार व राज्य मंत्रियों को पत्र भेजकर गऊ माता को राज्य माता घोषित करने की मांग की है। 

गोपाल मणि का संक्षिप्त परिचय

भारतीय गऊ क्रांति मंच के संस्थापक गोपाल मणि केन्द्रीय विद्यालय में संस्कृत के अध्यापक के साथ-साथ पुलिस विभाग में भी नौकरी कर चुके हैं। रामकथा व भागवत कथा करने के उपरांत वर्ष 2008 में पहली गऊ कथा की। श्री मणि के ओजस्वी वाणी का परिणाम है कि आज पूरे देश में गऊ माता की महिमा की चर्चा हो रही है।

गोपालमणि का मौन व्रत
गोपालमणि ने वर्ष 2011 से 2012 तक मौन व्रत भी रखा। व्रत के दौरान गऊ सेवा के साथ-साथ गऊ दूध का सेवन किया।

धेनु मानस ग्रंथ की रचना
गोपालमणि ने गऊ माता की महिमा को जन-जन तक पहंुचाने के लिए धेनु मानस ग्रंथ की रचना भी की। धेनु मानस गं्रथ आज देश के अधिकांश गऊ भक्त पढ़कर अपना जीवन धन्य कर रहे हैं और उनकी मनोकामनाएं भी पूर्ण हो रही हैं। धेनु मानस ग्रंथ को काशी विद्वत परिषद ने प्रमाणित भी किया है।

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