अमेरिका में हुई जबरद़स्त फायरिंग, हुई 17 की मौत


एजेंसी

नई दिल्ली। अमेरिका के एक स्कूल में एक बंदूकधारी ने अंधाधुंध फायरिंग की। इस हमले में 17 लोगों की जान चली गई। गोलीबारी के दौरान छात्र बुरी तरह डरकर चीखने लगे। उन्होंने अपने दोस्तों और परिवार के लोगों को मदद के लिए संदेश भेजने शुरू कर दिए। गोलीबारी की यह घटना मियामी से लगभग 72 किलोमीटर उत्तर में पार्कलैंड के मार्जरी स्टोनमैन डगलस हाई स्कूल में घटी। पुलिस के मुताबिक फायरिंग करने वाले का नाम निकोलस क्रूज है जो इसी स्कूल का छात्र रह चुका है। बताया जा रहा है कि 19 साल का आरोपी छात्र ने गुस्से में आकर ये फायरिंग की है। कुछ दिन पहले ही उसकी गलत आदतों और गलत व्यवहार के कारण उसे स्कूल से निकाल दिया गया था। आरोपी पूर्व छात्र स्कूल की हर चीज से पूरी तरह वाकिफ था। पुलिस के मुताबिक आरोपी ने पहले स्कूल का फायर अलार्म बजाया। फायर अलार्म बजते ही स्कूल में अफरा तफरी मच गई जिसके बाद आरोपी ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। ब्रोवार्ड काउंटी शेरिफ स्कॉट इजरायल ने भी पूर्व छात्र के गिरफ्तारी की पुष्टि की है और बताया कि बंदूकधारी ने बिना किसी संघर्ष के पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। उन्होंने कहा, श्यह आपत्तिजनक है। इसके लिए वास्तव में कोई शब्द नहीं हैं। ब्रोवार्ड काउंटी स्कूल अधीक्षक रॉबर्ट रुन्सी ने कहा, श्यह एक भयावह स्थिति है।श् इस घटना में विद्यालय के अंदर 12 लोग मारे गए जबकि दो लोगों की मौत विद्यालय के बाहर हुई। वहीं एक व्यक्ति सड़क पर मारा गया तथा दो लोगों की अस्पताल में मृत्यु हुई। मृतकों में कई छात्र शामिल हैं। अधिकारी शेरिफ ने कहा, श्श्अभी तक, हमारा मानना है कि उसके पास एक एआर-15 राइफल था। मुझे नहीं पता कि उसके पास दूसरा राइफल था या नहीं। संदिग्ध को इलाज के बाद पुलिस को सौंप दिया गया है। घटना में कम से कम 17 लोग मारे गये हैं। स्कूल भवन के भीतर 12 लोगों की, स्कूल भवन के बाहर दो लोगों की और स्कूल के बाहर सड़क पर एक व्यक्ति की गोलीबारी में मौत हुई जबकि दो अन्य ने अस्पताल में दम तोड़ दिया। इस्राइल ने हालांकि मृतकों में छात्रों की संख्या नहीं बतायी है। स्कूल में बड़ी संख्या में भारतीय-अमेरिकी समुदाय के छात्र हैं और इस घटना में कम से कम एक छात्र के घायल होने की सूचना है। बंदूक नियंत्रण समूह अनुसार अमेरिका के विद्यालयों में इस वर्ष अब तक गोलीबारी की 18 घटनाएं घटित हो चुकी है जिसमें आत्मघाती घटनाएं और वह घटनाएं भी शामिल हैं जिसमें कोई भी घायल नहीं हुआ। इस घटना के बाद देश में हथियार रखने को लेकर बने कानून पर फिर से बहस शुरू हो सकती है। देश में हर साल 33 हजार लोग बंदूक से जुड़ी घटनाओं के मौत का शिकार बनते हैं।

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